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Saturday, 24 November 2012

सर्दियों में चुस्त दुरुस्त रहना हो तो पौष्टिक आहार लें


सर्दियों के मौसम में आपके खाने की वैराइटी बढ़ जाती है साथ ही आपकी पाचन शक्ति भी बढ़ जाती है, इसलिए आप गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में ज्यादा खाना खा लेते हैं तो उसे पचने में कोई समस्या नहीं होती है।लेकिन हैवी डाइट लेने के साथ-साथ यह भी जानना जरुरी है आपके लिए सर्दियों में आप क्या खाएं जिससे आपको स्वाद के साथ पोषण भी मिले। आईए जानें सर्दियों में कैसा हो आपका खान-पान।

नाश्ता जरुरी

सुबह का नाश्ता हमारे लिए जरुरी होता है क्योंकि इसे हमें ऊर्जा मिलती है।नाश्ते में अंडे के साथ ब्रेड, उपमा, सैंडविच, डोसा आदि ले सकते हैं। रोजाना नाश्ते के बाद बिना फैट वाला एक गिलास गर्म दूध लेना न भूलें। इन सबके साथ फ्रूट या वेजीटेबल सलाद भी आप अपने नाश्ते में ले सकते हैं।

हरी चटनी शामिल करें लंच में

दोपहर के भोजन में हरी सब्जी, चपाती, ताजा दही या छाछ, छिलके वाली दाल के साथ चावल, गरमा-गरम सूप ले सकते हैं।
लंच में थोड़ी मात्रा में हरी चटनी का सेवन जरुर करें। इसे भोजन में मल्टीविटामिन्स की कमी  पूरी होगी।

डिनर जल्दी करें

रात का भोजन आपके दोपहर के भोजन की अपेक्षा हल्का होना चाहिए। सर्दियों में रात को आप जल्दी भोजन करने की आदत डालें।
रात को भोजन में आप खिचड़ी या दलिया जैसे हल्के भोजन का सेवन करें। सोने से कम से कम 4 घंटे पहले भोजन करने से शरीर में भोजन का पाचन ठीक से होता है। रात को सोने से पहले हल्दी, अदरक मिले एक गिलास गर्म दूध जरुर लें।

अन्य महत्वपूर्ण बातें


  • सर्दियों में हमें ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है , इसलिए ऐसी चीजें खानी चाहिए जो शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ हमारे इम्यून सिस्टम को भी ठीक रखें।
  • इस मौसम में प्रोटीन व फाइबर से भरपूर चीजें खानी चाहिए।
  • खाने के साथ प्रोटीनयुक्त ड्राईफ्रूट्स भी ले सकते हैं। जैसे बादाम , अखरोट , काजू , पिस्ता शरीर को देर तक गर्म रखते हैं। बादाम बिना भिगोए नहीं खाएं। इन्हें लेने के बाद ज्यादा देर तक भूख नहीं लगती और संतुष्टि का अहसास होता है। इससे सर्दियों में मोटापे से बचेंगे।
  • खाने में फल और सब्जियों की मात्रा ज्यादा हो। गाजर , मूली , टमाटर जैसी सब्जियां लेनी चाहिए जिनमें ऐंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं , जो शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
  • तिल से बनी चीजों में ओमेगा -3 होता है जिसमें ऐसे फैट होते हैं , जो शरीर को गर्मी देते हैं , लेकिन मोटापा नहीं बढ़ाते।
  • सर्दियों में डीहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है इसलिए पानी भरपूर पीते रहें।






Conditioning Chamber
Humidity Chamber  
Twist Tester  
Coating Thickness Tester  
Crush Tester 

Tuesday, 11 September 2012

आग से जल जाना ( FIR BURN )

खासकर रसोई में काम करते हुए जरा सी लापरवाही से हाथ जल जाता है. ऐसे मौके पर अनेक घरेलु नुसखे आप आजमाते होंगे. आपको ऐसा नुस्खा बताने जा रहा हूँ जिसके प्रयोग से ना केवल जलन तुरंत ठीक होगी बल्कि ना फफोला पड़ेगा, और ना ही जले का निशान रहेगा. 


करना क्या है ? 
चूने का निथरा हुआ पानी, या नारियल तेल तब तक लगातार लगातें रहें, जब तक जले का निशान बाकी रहे. (यदि आप चूने का पानी बनाकर घर में रखें तो वक्त ज़रुरत काम आ सकता है, चूने का पानी दीपावली के दिनों में चूना भिगोने के बाद एक बोतल भर कर रखा जा सकता है. ये ख़राब भी नहीं होता ) चूने का पानी कैल्शियम से भरपूर होता है, इसलिए दांत निकालते बच्चों को भी उचित मात्रा में पीने को दिया जा सकता है, इससे बच्चा मिटटी खाना छोड़कर आसानी से दांत निकाल लेता है.

Monday, 10 September 2012

आंखो के दर्द से कैसे पाएं मुक्ति


  • बचपन में बेलमिरी के बीज की मिंगी शहद में मिलाकर चटाने से जीनवभर आंखे नहीं दुखती। 
  • नींबू के रस की एक बूंद महीने में एक बार आंखों में डालने से कभी आंखे नहीं दुखती। 
  • तिल के 5 ताजे फूल प्रातःकाल अप्रैल माह में निगलें। इससे पूरे वर्ष आंखे नहीं दुखेंगी। 
  • चैत्र के महीने में गोरखमुंडी के 5 या 7 ताजे फूल चबाकर पानी के साथ सेवन करने से आंखों की ज्योति बढ़ती है। 
  • रूई के फाऐ को ठंडे पानी में भिगोर शुद्ध घी लगाकर आंखो के दर्द में लाभ मिलता है। 
  • हरी दूब पीसकर उसका रस आंखो के उपर लेप करने से दर्द मिटता है। 

Friday, 7 September 2012

नकसीर के घरेलू उपचार (Epistaxis Treatment)


चिलचिलाती धूप में अक्सर कुछ लोगों को नाक से खून बहने की शिकायत होती है। इसे नकसीर भी कहा जाता है। यह मौसम के अनुसार शरीर में अधिक गर्मी बढ़ने से भी हो सकता है और कुछ लेगों को अधिक गर्म पदार्थ का सेवन करने से भी। पेश है नकसीर से निपटने के घरेलू उपचार:

1. प्याज को काटकर नाक के पास रखें और सूंघे। 
2. काली मिटी पर पानी छिड़ककर इसकी खुशबू सूंघें।
3. रूई के फाए को सफ़ेद सिरका में भिगोकर उस नथुने में रखें, जिससे खून बह रहा हो |
4. जब तक नाक से खून बह रहा हो तो कुर्सी पर बिना टेक लिए बैठ जाएं नाक की बजाए मुंह से सांस लें।
5. सिर को आगे की ओर झुकाए न कि पीछे की ओर। 
6. ठंडे पानी में भीगे हुए रूई के फाए को नाक पर रखें। रूई के छोटे-छोटे फायों को पानी में भिगोकर फ्रीजर में रख लें। इनसे सिकाई करें। 
- किसी भी प्रकार के धूम्रपान (एक्टिव या पैसिव दोंनो) से बचे। 
- साफ हरे धनिए की पत्तियों के रस की कुछ बूंदे नाक में डाल लें। 
7. इन उपायों के अलावा सि पर ठंडे पानी की पट्टी रखने से भी राहत मिलेगी। 



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Laboratory Burners 
Infra Red Burners 
Mono block burners 
High Pressure Regulator 
Industrial Burners

Wednesday, 5 September 2012

नाभि स्पंदन से रोग की पहचान


आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में  रोग पहचानने के कई तरीके हैं। नाभि स्पंदन के रोग की पहचान का उल्लेख हमें हमारे आयुर्वेद व प्राकृतिक उपचार चिकित्सा पद्धतियों में मिल जाता है। परंतु इसे दुर्भाग्य ही कहना चाहिए कि हम हमारी अमूल्य धरोहर को न संभाल सके। 

कैसे होती है नाभि स्पंदन से रोगों की पहचान 
यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है यानी छाती की तरफ तो अग्न्याष्य खराब होने लगाता है। इससे फेफड़ों पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों होने लगती है। यदि यह स्पंदन नीचे की तरफ चली जाये जो पतले दस्त होने लगते है। बाई ओ खिसकने से शीतलता की कमी होने लगती हैए सर्दी-जुकामए खांसी, कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं। 

यदि यह ज्यादा दिनों तक रहेगी तो स्थायी रूप से बीमारियाँ घर कर लेती हैं। दाहिनी तरफ हटने पर लीवर खराब होकर मंदाग्नि हो सकती है। पित्ताधिक्य, एसिड, जलन आदि की शिकायतें होने लगती है। इससे सूर्य चक्र निष्प्रभावी हो जाता है। गर्मी-सर्दी का संतुलन शरीर में बिगड़ जाता है। मंदाग्नि, अपच, अफरा, जैसी बीमारियाँ होने लगती है। यदि नाफि पेट पर ऊपर आ जाए यानि रीढ़ के विपरित, तो मोटापा हो जाता है। यदि नाभि नीचे की ओर (रीढ़ की हड्डी की तरफ) चली जाए तो व्यक्ति कुछ भी खाए, वह दुबला होता चला जाएगा। नाभि के खिसकने से मानसिक एवं आध्यात्मिक क्षमताएं कम हो जाती है। नाभि का पाताल लोक भी कहा गया है। कहते है मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में छः मिनट तक रहते है। यदि नाभि ठीक मध्यमा स्तर के बीच में चलती है तब स्त्रियाँ गर्भधारण योग्य होती है। यदि यही मध्यमा स्तर से खिसकर नीचे रीढ़ की तरफ चली जाए तो स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। 

अकसर यदि बिल्कुल नीचे रीढ़ की तरफ चली जाती है तो फैलापियन टयूब नहीं खुलती और इस कारण  स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं रह सकतीं। कई बंध्या स्त्रियों  पर प्रयोग कर नाभि का मध्यमा स्तर पर लाया गया। इससे बंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो गई। कुछ मामलों में उपचार वर्षों से चल रहा था एवं चिकित्सकों ने यह कह दिया था कि यह गर्भधारण नहीं कर सकती किन्तु नाभि-चिकित्सा के जानकारों ने इलाज किया। उपचार पद्धति आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में पूर्व से ही विद्यमान रही है। नाभि को यथास्थान लाना एक कठिन कार्य है। थोड़ी-सी गड़गड़ी किसी नई बीमारी को जन्म दे सकती है। नाभि-नाडि़योंका संबंध शरीर के आंतरिक अंगों की सूचना प्रणाली से होता है।  

यदि गलत जगह पर खिसक जाए व स्थायी हो जाये तो परिणाम अत्याधिक खराब हो सकता है। इसलिए नाभि नाड़ी को यथास्थान  बैठने के लिए योग्य व जानकार चिकित्सकों का ही सहारा लिया जाना चाहिए। नाभि को यथास्थान लाने के लिए रोगी को रात्रि में कुछ खाने को न दें। सुबह खाला पेट उपचार के लिए जाना चाहिए। क्योंकि खाली पेट ही नाभि नाड़ी की स्थिति का पता लग सकता है।



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Tuesday, 4 September 2012

अधिक चाय पीने से हो सकता है कैंसर

अधिक चाय पीने वाले पुरुषों के लिए चेतावनी है कि अगर वो दिन में सात कप या उससे अधिक अधिक पीते हैं तो उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है.


ब्रिटेन के ग्लासगो विश्वविद्यालय ने छह हजार लोगों पर 37 वर्षों तक शोध करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है.

उन्होंने अपने शोध में बताया है कि जो लोग भर दिन में सात या सात से अधिक कप चाय पीते हैं उन्हें चाय न पीने वाले या सात कप से कम चाय पीने वालों की तुलना में पचास फीसदी अधिक कैंसर होने की आशंका है. हालांकि ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा है कि वो यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि चाय की वजह से ही कैंसर हो रहा है या फिर उस खास जगह पर उनके रहने से लोगों को कैंसर हो रहा है.

मरीजों में वृद्धि

स्कॉटलैंड के पुरुषों में प्रोटेस्ट कैंसर पिछले दस साल में लगभग 7.4 फीसदी की दर से बढ़ी है. स्कॉटलैंड में मिडस्पान के सहयोग से यह शोध वर्ष 1970 में शुरु हुआ जिसमें 21 साल से 75 साल के 6,016 पुरुषों को शामिल किया गया था.

जिन लोगों के उपर यह शोध किया गया, उन्हें एक प्रश्न सूची देकर उनसे उनके खान-पान के बारे में पूछा गया था कि वे चाय, कॉफी, सिगरेट या फिर शराब कितना पीते हैं और सामान्यतया उन लोगों का स्वास्थ्य कैसा रहा है. उसके बाद उनके स्वास्थ्य की जांच भी की गई थी. शोध में शामिल किए गए लोगों में पाया गया उनमें से एक चौथाई लोग अधिक मात्रा में चाय पीते थे.

प्रोस्टेट कैंसर

शोध में पाया गया कि उनमें से 6.4 फीसदी लोगों में 37 वर्षों के दौरान प्रोस्टेट कैंसर पाया गया.

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो पुरुष भर दिन में सात कप चाय पीते हैं उनमें चार कप या उससे कम चाय पीनेवालों के मुकाबले में कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ है.

इसके प्रमुख शोधकर्ता ग्लासगो विश्ववद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड वेलबीइंग के डॉक्टर खरीफ शफीक थे. डॉक्टर शफीक का कहना है, “पहले किए गए ज्यादातर शोध में यह बताया गया है कि चाय पीने वालों को कैंसर या तो नहीं होता है या फिर कैंसर में काली चाय पीना या ग्रीन टी पीना लाभदायक होता है.”

उनका कहना था, “हमें नहीं पता कि चाय पीने से ही कैंसर होता है या फिर जहां वे रह रहे हैं उन्हें कैंसर होता है. लेकिन शोध से हमें पता चला कि जो लोग ज्यादा चाय पीते हैं वे कम मोटे होते हैं, वे समान्यतया शराबी नहीं होते हैं और उनका कोलेस्ट्रोल स्तर कम होता है.”

डॉक्टर शफीक का कहना है, “हमने अपने विश्लेषण में उन सभी बातों को ध्यान में रखा लेकिन पाया कि जो लोग ज्यादा चाय पीते हैं वे प्रोसटेट कैंसर के अधिक शिकार होते हैं.”

ग्रीन टी

इडिनबर्ग एंड लोथियन प्रोसटेट कैंसर सपोर्ट ग्रुप के सदस्य क्रिस गार्नर का कहना है कि उस शोध से वो चाय पीना नहीं छोड़ेंगें. दस साल पहले उन्हें पता चला कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है. उस समय से उन्होंने गुणकारी खाना खाना शुरु कर दिया और ग्रीन चाय पीनी शुरु कर दी.

क्रिस गार्नर का कहना है, “होता यह है कि आपको एक तरफ कुछ और बताया जाता है और दूसरी तरफ कुछ और बताया जाता है और आप इस असमंजस में फंसे होते हैं कि किसे सही मानें. लेकिन मेरा कहना है कि अगर आप बेहतर खाना खाते हैं तो चाय पीना या न पीना इतना महत्वपूर्ण रह नहीं जाता.”

प्रोटेस्ट कैंसर चैरिटी के प्रमुख डॉक्टर केट होम्स का कहना है, “ऐसा लगता है कि जिन छह हजार लोगों ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया है और जो लोग प्रतिदिन सात या उससे अधिक चाय पीते हैं, उनके उपर किए गए शोध में परिवार और उनके खाने-पीने की आदतों का ध्यान नहीं रखा गया है.”

केट होम्स के अनुसार, “इसलिए हम यह नहीं चाहेगें कि कोई व्यक्ति इस बात से परेशान हों कि अगर वो चाय पीते हैं तो उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है जबकि वो बेहतर खाना खाते हैं.”

Saturday, 24 March 2012

Specialized Corporate Services

  1. Pre-employment checkup, general checkup, before joining an organization.
  2. Once a week medical checkup for employees by our medical office.
  3. Talk on ergonomics or any topics related to medical.
  4. First aid training program conducted.
  5. Ambulance service along with a doctor or nurse for any of the events in your organization.
  6. Home care services along with a doctor or nurse for any of the events in your trained attendees nurses.
  7. Supply all hospital equipments on rental basis, i.e. O2 cylinder, hospital cot, Wheel chair, commode chair, portable x-ray, collecting samples.