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Friday, 21 September 2012

करी बचाएगा कैंसर से

ब्रिटेन के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 'करी' में इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले हल्दी से कैंसर के रोगियों को कितनी राहत मिल सकती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हल्दी में पाए जाने वाले तत्व करक्यूमिन से 'आंत के कैंसर' से पीड़ित मरीज़ों को राहत मिल सकती है.



पहले प्रयोगशाला में किए गए शोध से पता चला है कि हल्दी कैंसर की कोशिकाओं को मारने में मददगार होता है. शोध में यह पहले ही यह साबित हो चुका है कि हल्दी में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो हृदयघात और पागलपन में भी लाभदायक साबित होता है.

हल्दी के असर को जानने के लिए अब इंगलैंड के लिसेस्टर में मरीजों को कीमोथेरेपी के साथ-साथ हल्दी से भी उपचार किया जाएगा, जिससे पता चल सके कि यह कितना असरकारी है.

कीमोथेरेपी कठिन
इंगलैंड में हर साल चालीस हजार लोग आंत के कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं. अगर यह बीमारी शरीर में फैल जाती है तो मरीजों को तीन कीमोथेरेपी की दवा दी जाती है, लेकिन आधे मरीजों पर इसका असर नहीं होता है. लिसेस्टर के रॉयल फैमिली इनफर्मरी और लिसेस्टर जेनरल हॉस्पिटल में चालीस मरीजों के उपर इसका प्रयोग किया जाएगा. इस प्रयोगात्मक इलाज में उन चालीस मरीजों को कीमोथेरेपी द्वारा इलाज शुरु करने के सात दिन पहले करक्यूमिन दवा दी जाएगी.

असरकारी है हल्दी
कैंसर पर हल्दी के प्रभाव पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं के प्रमुख प्रोफेसर विलियम्स स्टीवर्ड का कहना है कि जानवरों के ऊपर हल्दी और कीमोथेरेपी का जब एक साथ इस्तेमाल किया गया तो यह अन्य प्रयोग की तुलना में ‘सौ फीसदी से ज्यादा लाभदायक’ था. प्रोफेसर विलियम्स का कहना है कि इससे उन्हें इसका प्रयोग मरीजों के ऊपर करने की प्रेरणा मिली. उनका कहना था, “जब आंत का कैंसर पूरी तरह फैल जाता है तो इसका इलाज काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कीमोथेरेपी का बुरा असर काफी ज्यादा होता है. हल्दी कीमोथेरेपी के बुरे असर को कम करने में मददगार हो सकता है, इससे मरीजों को कम मात्रा में, लेकिन लंबे समय तक कीमोथेरेपी दिया जा सकता है.”

शोध शुरुआती दौर में
प्रोफेसर विलियम्स का कहना है, “हालांकि यह शोध अभी शुरुआती दौर में है और हल्दी से कैंसर का इलाज भी एक पहेली जैसा ही है. लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि हम भविष्य में नई दवा को खोज कर लेगें.”
इंगलैंड कैंसर रिसर्च के जोना रेनोल्ड्स का कहना है, “इस तरह के परीक्षण से हमें अन्य फायदों के बारे में पता चल सकेगा. इससे हम अधिक मात्रा में हल्दी का उपयोग करके शोध को आगे बढ़ा सकते हैं. साथ ही, हमें इसकी जानकारी भी मिलेगी कि हल्दी से कैंसर के रोगी के उपर क्या बुरा असर पड़ता है.”


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Thursday, 13 September 2012

वायरल बुखार में खूब खाएं (Viral fever)


मौसम में बदलाव के साथ ही शरीर में भी कई प्रकार के बदलाव शुरू हो जाते हैं और गर्मी में मौसम शरीर नमीयुक्त और चिपचिपा होने लगता है। इस मौसम में वायरल बुखार से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं वायरल से होने वाला बुखार, गला दर्द व नाक बहने की समस्याएं ज्यादा लेकर आता है। यह बुखार बच्चों व बड़ों को समान रूप से प्रभावित करता है। वायरल में संक्रमण की स्थिति कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है। वायरल में कई लोग खाना-पीना छोड़ देते है। लेकिन खाना छोड़ने से बीमारी और बढ़ जाती है। इसलिए जहां तक संभव हो वायरल में खूब खाना खाएं और डिहाइडेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं।


वायरल बुखार में खाने के फायदे
वायरल बुखार तभी होता है जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैं और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खान-पान का उचित ध्यान रखना चाहिए। अगर सेहतमंद और प्रोटीन युक्त खाना खाया जाए तो शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता खुद निर्मित हो जाती है। सादा, ताजा खाना ही खाएं क्योंकि हैवी फूड आसानी से पच नहीं सकते हैं। रखे हुए खाने को गर्म करके ही खाएं क्योंकि इससे सभी बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। खाने में अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, काल मिर्च, हल्दी और धनिए का प्रयाग अवश्य करें क्योंकि इनमें पाए जाने वाले तत्व पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं और वायरल के कीटीणुओं से लड़ते हैं। 

वायरल बुखार में क्या-क्या खाएं 
मौसमी संतरा व नींबू खाएं जिसमें विटामिन-सी और वीटा कैंरोटीस होता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वायरल फीवर होने पर ड्राई फूड खूब खाना चाहिए।  ड्राई  फूड में जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लहसून में कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं। इससे सर्दी, जुकाम, दर्द, सूजन और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। लहसुन घी या तेल तलकर चटनी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। खूब पानी पिएं। इससे डिहाइडेशन के अलावा शरीर पर हमला करने वाले माइक्रो आर्गेनिज्म को बाहर निकालने में मदद मिलती है। तुलसी के पत्ते में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी रोगों से लड़ने की शक्ति होती है। बदलते मौसम में तुलसी के पत्तियों को उबालकर या चाय में डालकर पीने से नाक और गले के इंफेक्शन से बचाव होता है।

वायरल बुखार में हरी और पत्तेदार सब्जियों का अधिक मात्रा में प्रयोग करें। क्योंकि हरी सब्जियों में पानी का मात्रा ज्यादा होती है जिससे डिहाइडेशन नहीं होता है। टमाटर, आलू और संतरा खाएं। इसमें विटामिन ‘सी’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वायरल में दही खाना बंद न करें क्योंकि दही खाने से बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक मिलती है साथ ही यह पाचन क्रिया को सही रखता है। यह पेट खराब , आलसपन और बुखार को दूर रखता है। वायरल में गाजर खाएं, इसमें केरोटीन पाया जाता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कीटाणुओं से लड़ने में मदद मिलती है। अधिक मात्रा में केले और सेब का सेवन करें। इन दिनों में ही अधिक मात्रा में पोटेशियम पाई जाती है जो ऐसा इलेक्ट्रोलाइट है जिससे दस्त समाप्त होती है। 

वायरल बुखार में खाना खूब खाएं लेकिन खाने का गलत कंबीनेशन कभी ना लें। मसलन अगर आप दही खा रहे हैं तो हैवी नानवेज या नींबू अथवा कोई खटटी चीज ना खाएं। ठंडे और तरल पेय पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि वे शरीर में पानी रोकते हैं और असंतुलन होता है। वायरल होने पर दिमाग पर बिल्कुल जोर न लगाएं क्योंकि ऐसा करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होगी और वायरल ज्यादा दिनों तक रह सकता है।


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अच्छे स्वास्थ्य का राज अंकुरित दालें (Sprouted Pulses)


अच्छा पोषण सभी की सेहत के लिऐ महत्वपूर्ण है। एक स्वास्थ्य आहार ही सभी उम्र के लोगों में काम करने की उत्पादकता को बढ़ाता है। ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जो आपकी सेहत के लिए लाभदायक हो सकते हैं। अंकुरित दालें एक ऐसा ही स्वस्थ आहार है जो आपके स्वास्थ्य से जुड़ी अनेकों बीमारियों की दवा बन सकता है।


मौसम के अनुसार सलाद जैसे गाजर, खीरा, ककड़ी, टमाटर, मूली, चुकन्दर, गोभी आदि खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। सलाद के साथ ही अगर अंकुरित दालों का आहार में शामिल किया जाए तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर काम्बीनेशन बन सकता है। अंकुरित मूंग, चना, मसूर, मूंगफली आदि शरीर की शक्ति बढ़ाते है। आहार विशेषज्ञ डाक्टर अंजली मुखर्जी के अनुसार ‘अंकुरित दालें थकान, प्रदूषण व बाहर के खाने से उत्पन्न होने वाले ऐसिडस को बेअसर कर देती हैं और साथ ही ये उर्जा के स्तर को भी बढ़ा देती हैं।‘ दाल अंकुरित करने के लिए अनाज को 8 घंटे तक पानी में भिगोकर रखने से अंकुरित तैयार हो जायेगा। अंकुरित दाले आपकी सेहत के लिए अमृत के समान है जिसमें कई आवश्यक पोषक तत्व और खनिज होतें हैं, जो कई बार आपको ताजा फल या सब्जियों से भी प्राप्त नहीं होते। अंकुरित दालों के सेवन से पाचन शक्ति में सुधार होता है और ये ऐंटीआक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं। 

अंकुरित दाल खानें के प्रमुख लाभ 

  • अंकुरित दालें रक्त को शुद्ध करने में लाभकारी होता हैं जो आपकी त्वचा से लेकर आके बालों को निखारने के मदद करती हैं। अगर आप बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो आप अंकुरित दाल की एक कटोरी रोज सुबह नाश्ते में लें। ऐसा करने के आपके बालों को सही पोषण मिलेगा। 
  • अंकुरित दालें आक्सीजन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत हैं। आक्सीजन युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में उपस्थित तरह-तरह के वाइरस और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट इशी खोसला कहती हैं - ‘अकुरित दालें एक संतुलित पोषण देता है। अंकुरित दालों से शरीर को प्रोटीन, कार्बोहैड्रेड, विटामिन और खनिज प्राप्त होता है जो की स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक है।’ 
  • अंकुरित दालें फाइबर का एक प्राकृतिक स्त्रोत हैं। फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और आपके नाश्ते और लंच के बीच के समय में आपको भरपेट रखता है। इससे आप अस्वास्थ्यकर चीजें खाने से बचते हैं और अपने आहार को भी नियंत्रित कर सकते हैं।
  • अंकुरित दालें विटामिन ‘बी’ और ‘सी’ का एक अच्छा स्त्रोत है। अनाज को पूरी रात भिगाकर रखने  से अंकुरित दालों में उपस्थित आवश्यक पोषण तत्वों की महत्ता और बढ़ जाती है इसलिए अंकुरित दालें हर तरह से आपको लाथ देती हैं।
  • आहार में अंकुरित दालें लेने से शरीर में प्राटीन की गिनती बढ़ती है। अंकुरित दालों में पर्याप्त मात्रा में वनस्पति प्राटीन होता है जो एक स्वस्थ आहार को सपोर्ट करता है। अंकुरित दालें मांस के लिए एक स्वस्थ विकल्प है। अगर आप शाकाहारी हैं तो अंकुरित दालों को अपने प्रतिदिन के आहार का हिस्सा बनाएं। 
  • अंकुरित दालों में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है। अगर आप अपने वजन को लेकर चिंतित हैं और कैलोरी घटाने का आसान तरीका ढूंढ़ रहे हैं तो अंकुरित दालें आपकी जीवन शैली को स्वस्थ रूप देंगी। 

आजकल की जीवन शैली को स्वस्थ आहार बहुत महत्व रखता है अंकुरित दालों को अपने आहार में शामिल कर आप कई बीमारियों से मुक्त हो सकते हैं तो दे न करे अभी अंकुरित दालों से बना सैंडबिच या सलाद बनाएं और स्वादिष्ट, स्वस्थ, सकारात्मक एवं मुस्कुराते हुए जीवन का आनन्द लें।



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Thursday, 6 September 2012

चेहरे का सांवलापन कैसे दूर करे

चेहरे का सांवलापन दूर करना व रंग साफ़ करने का नुसका इससे आपके पर्स के काफी पैसे बचेंगे .

करना क्या है ? 
(1) चार बादाम गिरी सुबह पानी में भिगों दें शाम को गिरी का छिलका उतार लें,फिर उनको दो चम्मच दूध में इतना बारीक़ घोट लें कि दूध ही बन जाये. आप इसे "बादाम का दूध" कह सकतें हैं


ये बादाम - दूध रात को चेहरे पर लगाकर सो जाएँ. सुबह ठन्डे पानी से धो लें इसका असर १५-२० दिनों में ही नज़र आने लगता है.

(2) सुबह घास-पत्तों पर पड़ी ओस कि बूंदों को साफ रुमाल से सोख लें रुमाल गीला हो जायेगा उससे चेहरे को गीला करते रहें.

(3) साबुन के स्थान पर एक चम्मच बेसन, दो चम्मच दूध का पेस्ट लगाकर १५ मिनट बाद मुंह को धोये


 (4) सामान्यतः चेहरे को साफ रखने के लिए नीम्बू रस का प्रयोग करे तो बहुत लाभ होगा|




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Monday, 3 September 2012

आपका बच्चा मोटा तो नहीं हो रहा है?

दो से चार वर्ष उम्र के बच्चे यदि ज्यादा टेलीविज़न देखते हैं तो दस वर्ष के होते होते वो मोटे हो सकते हैं.

कनाडा में हुए एक शोध में पता चला है हर हफ़्ते एक घंटे अधिक टीवी देखने पर कमर का घेरा आधा मिलिमीटर तक बढ़ जाता है और मांसपेशियों की ताक़त घटती है सो अलग.

बायोमेड सेंट्रल जर्नल में प्रकाशित इस शोध में 1,314 बच्चों के टीवी देखने की आदतों का अध्ययन किया गया. विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों को एक दिन में दो घंटों से ज़्यादा टीवी नहीं देखना चाहिए.

शोधकर्ताओं को पता चला कि जब शोध शुरु किया तो बच्चे हर हफ़्ते औसतन 8.8 घंटे टीवी देखते थे. लेकिन अगले दो वर्षों में जब बच्चे साढ़े चार वर्ष के हुए तो हर हफ़्ते टीवी देखने का औसत 14.8 घंटे हो चुका था.

शोध में शामिल बच्चों में से 15 प्रतिशत हर हफ़्ते 18 घंटों से ज़्यादा टीवी देख रहे थे. शोध में कहा गया है कि साढ़े चार वर्ष की उम्र में हर हफ़्ते 18 घंटे टीवी देखने का मतलब है कि 10 वर्ष की उम्र तक कमर के घेरे में 7.6 मिलिमीटर की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी.



शारीरिक क्षमता भी घटी

कमर का घेरा नापने के अलावा शोधकर्ताओं ने बच्चों पर लंबी कूद का भी परीक्षण किया, जिससे कि बच्चों की मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक मज़बूती का पता लगाया जा सके.

शोधकर्ताओं का कहना है कि एक घंटे अतिरिक्त टीवी देखने से बच्चे के कूदने की क्षमता 0.36 सेंटीमीटर घट जाती है. हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जो नतीजे उन्होंने निकाले हैं उसका सीधा ताल्लुक टीवी देखने भर से है या इसकी कुछ और है.

इस शोध की सहलेखक डॉ लिंडा पैगनी यूनिवर्सिटी मॉन्ट्रियल में कार्यरत हैं. वो कहती हैं कि टीवी देखने की आदत उन वजहों में से एक हो सकती है जिससे बच्चों में मोटापा पनपता है.

डा पैगनी कहती हैं, "सीधी बात ये है कि एक सीमा से ज्यादा टीवी देखना ठीक नहीं है."

अमरीकन एकैडेमी ऑफ़ पेडियाट्रिक्स का कहना है कि दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को हर दिन दो घंटों से अधिक टीवी नहीं देखना चाहिए.

डॉ पैगनी का कहना है कि पूरे पश्चिम में बच्चों और वयस्कों दोनों में अनावश्यक वज़न बढ़ा है.

उनका कहना है, "टीवी देखने की वजह से हमारी जीवन शैली भी बदली है और अब हम आसानी से तैयार होने वाला खाना खाते हैं, जिसमें ज्यादा कैलोरी होती है और हमारी निष्क्रियता बढ़ती है."

इस शोध में ये भी कहा गया है कि बचपन में टीवी देखने की आदतों की वजह से वयस्क होते तक शारीरिक मजबूती पर भी बहुत असर पड़ता है.


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Tuesday, 28 August 2012

गर्म रातों में कैसे पाएं सुकून की नींद ?

इस साल ब्रिटेन के दक्षिणी और पूर्वी हिस्से में आंशिक तौर पर गर्म हवा का असर रहा है. इन गर्म और उमस भरी रातों में सोना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में अच्छी नींद भला कैसे पाई जा सकती है, ये एक बड़ा सवाल है?

लेकिन ब्रिटेन में जहां आमतौर पर इतनी ज्यादा गर्मी नहीं पड़ती, वहां के लोग भला कैसे अच्छी नींद पाएं, ये एक बड़ा सवाल है?अमरीका जैसी जगहों पर जहां बड़े आकार के एयर कंडीशनर आसानी से मिल जाते हैं, वहां ज्यादा तापमान भी मायने नहीं रखता.

विशेषज्ञों की सलाह

मौसम वैज्ञानिक फिलिफ एडन, भूमध्यसागर में प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीक की सलाह देते हुए कहते हैं, ''मैं दिन के समय अपने घर के सभी पर्दों को लगाए रखता हूं ताकि सूरज की रौशनी अंदर ना आ सके. जिस तरफ से धूप आती है, वहां की खिड़कियों को बंद रखता हूं और जहां छाया होती है, उधर की खिड़कियां खुली रखता हूं. इसका मतलब ये भी होता है कि मैं दिनभर खिड़कियों को बंद करने के लिए घर के भीतर दौड़ लगाता रहता हूं.''
एडन सोने से ठीक एक घंटे पहले सभी खिड़कियों को खोल देते हैं. लेकिन हर कोई अपने घर की खिड़की भी नहीं खोल सकता है. क्योंकि अगर आप नीचे के माले में रहते हैं तो चोर बड़ी आसानी से आपके घर में हाथ साफ कर सकते हैं. अगर चोरों से बच गए तो मच्छर आपको नहीं छोड़ेंगे.
लंदन के इंपीरियल कॉलेज में स्लीप एंड रेस्पिरेटरी फिज़ियोलॉजी के प्रोफेसर मेरी मोरल के अनुसार, ''ऐसे में सबसे कारगर उपाए है बिजली का पंखा इस्तेमाल करना. ये आपके शरीर से निकलने वाले पसीने को सुखाने में आपकी मदद करेगा.''

मामला सिर्फ तापमान और उमस का नहीं

मेरी मोरल बिस्तर पर नायलोन के बजाए सूती चादर बिछाने और ग्रामीण इलाकों में मच्छरदानी इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं.
लफबोराह यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल स्लीप रिसर्च यूनिट के प्रोफेसर केविन मोर्गन मानते हैं कि ये मामला सिर्फ तापमान और उमस का नहीं है.
इसका मतलब ये होता है कि हम बिस्तर पर एक बिल्कुल ही दूसरी शारीरिक और मानसिक स्थिति में जाते हैं. अक्सर लोग ऐसे माहौल में सामान्य से ज्यादा शराब पी लेते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है. क्योंकि ये एकदम अलग किस्म का नियम या मानसिक स्थिति पैदा करता है.
\केविन मॉर्गन कहते हैं, ''इतनी गर्मी में जब आप बिस्तर पर जाते हैं तो आपको आसानी से नींद नहीं आती. जो चीज़ें आपको सोने नहीं देतीं, आप उन्हीं के बारे में सोचना शुरु कर देते हैं. ऐसे में आप अपनी समस्याओं के बारे में सोचना शुरु ना कर दें, ये कहीं ना कहीं आपको अनिद्रा की तरफ लेकर जाती है. ऐसे में दिन के वक्त नींद पूरी करना और रात में कोई किताब या अखबार पढ़ लेना बेहतर उपाय है.''

ड्रिंक का नींद से संबंध

ऐसे में कोई तरल पदार्थ लेना सही नहीं होगा जब तक कि आप ऐसा आमतौर पर करते आ रहे हों.
केविन मॉर्गन कहते हैं, ''अगर आपको एकाध ड्रिंक लेने की आदत है तो फिर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर आपको इसकी आदत नहीं है तो ऐसा बिल्कुल ना करें. शराब कई बार आपको नींद में ले जाने के लिए बेहतर साबित होती है, लेकिन जगाने के लिए ये बिल्कुल सही नहीं है.''
इसके अलावा ठंडे पानी से नहाना भी कोई सही उपाय नहीं है, इससे आपको थोड़ी देर के लिए तो राहत मिल सकती है लेकिन ये ज्यादा कारगर नहीं है. अगर नहाना हो तो हल्के गुनगुने पानी से नहाएं.
मॉर्गन के अनुसार, ''मुख्य बात ये है कि ऐसी स्थिति में परेशान ना हों. अगर आप स्वस्थ हैं तो दो रात बगैर सोए भी रह सकते हैं.''
क्योंकि तीसरी रात तक आप इतने थक जाएंगे कि खुद-ब-खुद आपको नींद आ जाएगी, तापमान चाहे जैसा भी हो.




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Sunday, 26 August 2012

क्या उपवास है लंबी उम्र, अच्छी सेहत का नुस्ख़ा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर नियंत्रित तरीके से कुछ समय का उपवास रखा जाए तो इससे न सिर्फ बढ़ते वजन को घटाने बल्कि तमाम स्वास्थ्य संबंधी फायदे हो सकते हैं.

कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि उपवास रखना अकसर कष्टदायक होता है और इसका लंबे समय में कोई फायदा नहीं होता है. इसलिए जब मुझसे भूखा रहकर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए कहा गया तो मैं कतई उत्साहित नही था.
लेकिन 'हॉराइजन' (बीबीसी टीवी का एक कार्यक्रम) के संपादक ने मुझे भरोसा दिलाया कि ये एक नया विज्ञान है और इससे शायद मुझे अपने शरीर में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिलें.
मुझमें इतनी आत्मशक्ति नहीं थी कि मैं लंबे समय तक बिना खाए- पिए रह सकूं, लेकिन मुझमें इस बात का कारण खोजने की बेहद दिलचस्पी थी कि आखिर कम खाने से क्यों जीवन की अवधि बढ़ जाती है.
हम 1930 से ही उस प्रयोग के बारे में जानते हैं जिसमें पाया गया था कि कम कैलोरी पर पल रहे चूहे उन चूहों की तुलना में ज्यादा दिन तक जिन्दा रहे जिन्हें पौष्टिकता से भरपूर भोजन दिया गया था.
हार्मोन आईजीएफ-1
स्तनधारियों में जीवन अवधि बढाए जाने का विश्व रिकार्ड एक नई प्रजाति के चूहे का है जिसकी उम्र 40 फीसदी तक बढ़ सकती है. इस हिसाब से मनुष्य एक सौ बीस वर्ष की उम्र पा सकता है.
ये चूहे अनुवांशिक रुप से संवर्धित थे इसलिए इसके शरीर में बहुत ही कम मात्रा में उस हार्मोन आईजीएफ-1 का स्राव होता है जो उम्र बढ़ने के असर को बढ़ाता है.
शरीर में जितने अधिक आईजीएफ-1 हार्मोन का स्राव होगा उसका असर उम्र पर उतना ही अधिक होगा.
ये हार्मोन उस समय के लिए तो बहुत अच्छा है जब कोई बच्चा बढ़ रहा होता है, लेकिन उसके बाद की उम्र के लिए ये हार्मोन अच्छा नहीं है. पर इस हार्मोन आईजीएफ-1 के स्तर को उपवास रखकर घटाया जा सकता है. इसके पीछे की वजह शायद ये हो सकती है कि जब खाना खाना बंद कर दिया जाता है तो ये हार्मोन शरीर की वृद्धि की जगह उस शरीर में आ रही कमी को दुरुस्त करने लगता है.
अभी प्रमाणिक नहीं
दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर वाल्टर लौंग कहते हैं कि जैसे ही शरीर में आईजीएफ-1 हार्मोन का स्तर कम होता है तो इसका असर शरीर पर होता है और मरम्मत करने वाले कई जीन शरीर में सक्रिय हो जाते हैं
कहा जाता है कि शरीर में आईजीएफ-1 की बहुत कम मात्रा से इंसान बौना रह जाता है लेकिन वो बढ़ती उम्र से जुड़े दो प्रमुख रोगों कैंसर और मधुमेह से सुरक्षित रहते हैं.
हांलाकि मेडिकल आधार पर उपवास के फायदे अभी तक सिद्ध नही हैं और इस तरह के काफी शोध ऐसे है जो कहते है कि एक व्यक्ति को कम से कम दिन में दो हज़ार कैलोरी की जरुरत होती है.
तो ऐसे में अगर आप उपवास रखते हैं तो ऐसा डॉक्टरों के निरीक्षण में करें क्योंकि गर्भवती महिलाओं और मधुमेह के मरीज़ो के लिए ये खतरनाक भी हो सकता है.
कुलमिला कर संतुलन सबसे अच्छा रास्ता है चाहे खाने में हो या फिर उपवास में.



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Melting Point Apparatus
Electric Horn
Auto Horn
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Horn Parts

Tuesday, 17 April 2012

Corporate Care

We are having a number of Experts in their Arena and the Motto of our Team is "CARE IS ALWAYS BEYOND THAN CURE"

(Director)
New Born & Child Specialist
Dr. B. P. Dhami
M.B.B.S., D.C.H., MIMA

OBSTETRICIAN & gYNAECOLOGIST
Dr. (Mrs.) Varsha Dhami
M.B.B.S., D.G.O., MIMA

I.C.U.(Intensivist)
Dr. Dinesh Makkar
M.B.B.S., D.A., D.N.B., I.D.C.C.

Surgeon
Dr. Ashok Garg
M.B.B.S., M.S.

Saturday, 24 March 2012

Specialized Corporate Services

  1. Pre-employment checkup, general checkup, before joining an organization.
  2. Once a week medical checkup for employees by our medical office.
  3. Talk on ergonomics or any topics related to medical.
  4. First aid training program conducted.
  5. Ambulance service along with a doctor or nurse for any of the events in your organization.
  6. Home care services along with a doctor or nurse for any of the events in your trained attendees nurses.
  7. Supply all hospital equipments on rental basis, i.e. O2 cylinder, hospital cot, Wheel chair, commode chair, portable x-ray, collecting samples.

Thursday, 23 February 2012

Shakuntla Hospital

Shakuntla Hospital & Nursing Home is serving for years, How do you ensure good health for you and for your baby, now and in the future? What kind of vaccinations do you need to give your baby over the years? Do vaccinations really help in preventing diseases? Read on for the benefits of immunization.Our hospital gives better results.