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Tuesday, 4 December 2012

इस मौसम में दिल को रखें दुरुस्त


-रक्तवाहिनिया (ब्लड वेसेल्स) शरीर की गर्मी को बरकरार रखने की कोशिश में सिकुड़ जाती हैं। सर्दियों में पसीना नहीं निकलता है। इस कारण शरीर में नमक (साल्ट) सचित हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर में इजाफा होता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाब पड़ता है। परिणामस्वरूप, हृदय के क्रियाकलाप असामान्य हो जाते हैं। इस कारण पीड़ित व्यक्ति को सास लेने में दिक्कत होती है।

-इस मौसम में वाइरल बुखार के अलावा सास नली के ऊपरी भाग में सक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। वस्तुत: फेफड़ों और दिल के क्रियाकलाप आपस में एक दूसरे से सबधित होते हैं। इस प्रकार के सक्रमणों से दिल की स्थिति असहज हो सकती है।

-सर्दियों में अनेक पर्व-त्योहार और सामाजिक समारोह होते हैं। तमाम लोग इन समारोहों में अत्यधिक चिकनाईयुक्त व ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ ग्रहण करते हैं। इस मौसम में तमाम लोग कुछ ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं। इन सब का दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

-आम तौर पर सर्दिर्यो के मौसम में लोग सुबह कंबल या रजाई में रहना पसद करते हैं। वे सुबह व्यायाम या अन्य शारीरिक श्रम करने से कतराते हैं। इस कारण उनका वजन बढ़ जाता है।

समाधान

दिल से जुड़ी हुई उपर्युक्त स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान सभव है, बशर्ते कि आप कुछ सुझावों पर अमल करें

-जो लोग उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हैं, उन्हें सर्दियों में नियमित तौर पर ब्लडप्रेशर की जाच करनी या करवानी चाहिए। जाच से यह पता चल जाता है कि ब्लडप्रेशर सामान्य स्थिति में है या नहीं। अगर ब्लडप्रेशर असामान्य है, तो आप अपने फिजीशियन या हृदय रोग विशेषज्ञ से सपर्क कर नए सिरे से दवा की डोज सुनिश्चित कराएं। ऐसे लोगों को अपने खान-पान में नमक की मात्रा सीमित कर देनी चाहिए।

-इस मौसम के दौरान हार्ट अटैक के मामले भी बढ़ जाते हैं। इसलिए दिल के रोगी ठंड से बचाव के लिए हरसभव प्रयास करें। ऐसे रोगियों को टहलना जारी रखना चाहिए, लेकिन उन्हें सुबह तड़के नहीं टहलना चाहिए। ऐसे व्यक्ति धूप निकलने के बाद टहलने या जॉगिग करने जाएं। इसी तरह उन्हें सूर्यास्त के बाद भी नहीं टहलना चाहिए। व्यायाम नियमित रूप से जारी रखें। व्यायाम खाली पेट ही करें।

-जिन लोगों का हृदय रोग गभीर स्थिति में पहुंच चुका है या जिन लोगों के हृदय की मासपेशी कमजोर हो चुकी है, ऐसे लोगों को सर्दियों में सास लेने में तकलीफ और पैरों में सूजन की शिकायत हो सकती है। ऐसे व्यक्तियों को असामान्य लक्षण प्रकट होते ही शीघ्र ही हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

-सर्दियों में सीने में सक्रमण, दमा और ब्राकाइटिस से ग्रस्त होने की आशकाएं बढ़ जाती हैं। जो लोग हृदय रोगों से ग्रस्त हैं, उन्हें उपर्युक्त रोगों से बचने का हरसभव प्रयास करना चाहिए। इन रोगों के कारण पहले से ही हृदय रोगों से पीड़ित व्यक्तियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए सर्दी व प्रदूषण से बचें। अगर कोई हृदय रोगी सास सबधी किसी रोग से ग्रस्त हो जाता है, तो उसे शीघ्र ही इलाज कराना चाहिए। इनफ्लूएंजा और सीने के सक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टर के परामर्श से वैक्सीन लगवाएं।

-खान-पान की स्वास्थ्यकर आदतों पर अमल करें। खान-पान के प्रति सजग रहें। जमकर या भूख से अधिक खाना हाई ब्लडप्रेशर, हृदय रोग और मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए नुकसानदेह है।




  
Commercial Gas : In the liquefied petroleum gas (LPG) trade, 'industrial installations' generally refer to the installation at factories and the 'commercial installations' relate to the larger type of catering establishments, such as hotel, restaurants and canteens.
Industrial Gas : In the liquefied petroleum gas (LPG) trade, 'industrial installations' generally refer to the installation at factories and the 'commercial installations' relate to the larger type of catering establishments, such as hotel, restaurants and canteens.
Burners Fitting : Gas operated Infra Red Radiant Burners (can be adapted to radiant heat if required). Industrial uses include Brooding, Curing, Drying, Food Processing, almost all purposes where Metal Fabricating and Finishing, Textile Drying and Weld Pre-heating. Also available in longer length. This item is also available in as per customer requirement .
LPG Plants : Bulk LPG Installation can be Designed,  Supplied, Installed & Commissioned on  turnkey Basis In Accordance to Explosive Norms/Local Statutory Requirements.
Gas Cylinders : LOT  Manifold is installed where peak load of Equipments is higher & everage consumption of LPG is up no much ie its up to 2 tone per day.  We called this is a small bullet. It can install instead of bulk where there is space no space for bulk installation. This system is completely safe to handle. We follow Is-6044 Part-1 & 2 & OISD norms for these types of installations.

Sunday, 9 September 2012

लहसुन खाइए लहसुन के सप्लीमेंट्स नहीं


घरेलू मसालों तथा औषधियों का उपयोग अक्सर छोटी-मोटी बीमारियों में धड़ल्ले से किया जाता है। दादी-नानी के नुस्खों में कहें या ट्रेडिशनल विज्डम के रूप में, हल्दी से लेकर लौंग तक और प्याज से लहसुन तक लगभग हर चीज औषधीय गुण से भरी होती है। यह बात बहुत हद तक सही भी है, लेकिन यहां यह गौर करना जरूरी है कि ऐसी किसी भी औषधि का असर प्रत्येक व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है। 


एलोपैथी या चिकित्सक द्वारा सुझाई गई दवाइयों को अक्सर प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, संरचना और तासीर के हिसाब से दिया जाता है, जबकि घरेलू दवाइयां हम अक्सर बिना किसी ऐसी पूछताछ या मार्गदर्शन के ही ले लेते हैं। लहसुन का प्रयोग भी इसी श्रेणी में आता है। हृदयरोगियों के लिए यह बहुत अच्छा है या फिर इससे रक्त का शुद्धिकरण होता है आदि कहकर अक्सर लोग लहसुन की कलियों का सेवन करते हैं। इससे भी एक कदम आगे जिन लोगों के घर में लहसुन का प्रयोग वर्जित होता है या जिन्हें लहसुन की गंध पसंद नहीं होती, वे लहसुन के सप्लीमेंट्स धड़ल्ले से ले लेते हैं। यदि आप भी ऐसे लोगों में से हैं तो जरा गौर कीजिए। 

चिकित्सकों, विशेषज्ञों तथा जानकारों के अनुसार ऐसे किसी भी प्रयोग के पूर्व लहसुन के सप्लीमेंट्स किस तरह बनाए गए हैं, उन्हें कब पैक किया गया है, उसमें कितने पुराने लहसुनों का प्रयोग किया गया है तथा वे पावडर, तेल अथवा गंधरहित लहसुन सत्व किस रूप में लिए जा रहे हैं, इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है। 

यही नहीं, इसको किस मात्रा में लेना है, यह भी जानना जरूरी होता है। बाजार में मिलने वाले कई ब्राण्ड्स अक्सर ऐसे उत्पादों का बढ़ा-चढ़ा कर गुणगान करते हैं, लेकिन यह सब कुछ अधिकांशतः उपभोक्ता को प्रभाव में लेने के तरीके होते हैं। इनमें से कई तो मानक पैमाने तक के आसपास नहीं होते और कुछ में तो हानिकारक तत्व होते हैं, जो आप पर उलटा असर कर सकते हैं। 

खासतौर पर डाइबिटीज, उच्च रक्तचाप, कैंसर, हाई कोलेस्ट्रॉल तथा ऐसे ही रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को इनका सेवन बहुत ध्यान से या नहीं ही करना चाहिए। यदि आप पहले से कोई दवाई ले रहे हैं और साथ में ऐसे किसी सप्लीमेंट का भी प्रयोग करते हैं तो यह और भी हानिकारक सिद्ध हो सकता है। यह हमेशा ध्यान रखिए कि एक दक्ष तथा जानकार चिकित्सक हमेशा आपकी जांच तथा रोग इतिहास की जानकारी लेने के बाद आपको दवा देता है। इसलिए उसका विकल्प और कुछ भी नहीं हो सकता।




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Monday, 3 September 2012

आपका बच्चा मोटा तो नहीं हो रहा है?

दो से चार वर्ष उम्र के बच्चे यदि ज्यादा टेलीविज़न देखते हैं तो दस वर्ष के होते होते वो मोटे हो सकते हैं.

कनाडा में हुए एक शोध में पता चला है हर हफ़्ते एक घंटे अधिक टीवी देखने पर कमर का घेरा आधा मिलिमीटर तक बढ़ जाता है और मांसपेशियों की ताक़त घटती है सो अलग.

बायोमेड सेंट्रल जर्नल में प्रकाशित इस शोध में 1,314 बच्चों के टीवी देखने की आदतों का अध्ययन किया गया. विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों को एक दिन में दो घंटों से ज़्यादा टीवी नहीं देखना चाहिए.

शोधकर्ताओं को पता चला कि जब शोध शुरु किया तो बच्चे हर हफ़्ते औसतन 8.8 घंटे टीवी देखते थे. लेकिन अगले दो वर्षों में जब बच्चे साढ़े चार वर्ष के हुए तो हर हफ़्ते टीवी देखने का औसत 14.8 घंटे हो चुका था.

शोध में शामिल बच्चों में से 15 प्रतिशत हर हफ़्ते 18 घंटों से ज़्यादा टीवी देख रहे थे. शोध में कहा गया है कि साढ़े चार वर्ष की उम्र में हर हफ़्ते 18 घंटे टीवी देखने का मतलब है कि 10 वर्ष की उम्र तक कमर के घेरे में 7.6 मिलिमीटर की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी.



शारीरिक क्षमता भी घटी

कमर का घेरा नापने के अलावा शोधकर्ताओं ने बच्चों पर लंबी कूद का भी परीक्षण किया, जिससे कि बच्चों की मांसपेशियों की ताकत और शारीरिक मज़बूती का पता लगाया जा सके.

शोधकर्ताओं का कहना है कि एक घंटे अतिरिक्त टीवी देखने से बच्चे के कूदने की क्षमता 0.36 सेंटीमीटर घट जाती है. हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जो नतीजे उन्होंने निकाले हैं उसका सीधा ताल्लुक टीवी देखने भर से है या इसकी कुछ और है.

इस शोध की सहलेखक डॉ लिंडा पैगनी यूनिवर्सिटी मॉन्ट्रियल में कार्यरत हैं. वो कहती हैं कि टीवी देखने की आदत उन वजहों में से एक हो सकती है जिससे बच्चों में मोटापा पनपता है.

डा पैगनी कहती हैं, "सीधी बात ये है कि एक सीमा से ज्यादा टीवी देखना ठीक नहीं है."

अमरीकन एकैडेमी ऑफ़ पेडियाट्रिक्स का कहना है कि दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को हर दिन दो घंटों से अधिक टीवी नहीं देखना चाहिए.

डॉ पैगनी का कहना है कि पूरे पश्चिम में बच्चों और वयस्कों दोनों में अनावश्यक वज़न बढ़ा है.

उनका कहना है, "टीवी देखने की वजह से हमारी जीवन शैली भी बदली है और अब हम आसानी से तैयार होने वाला खाना खाते हैं, जिसमें ज्यादा कैलोरी होती है और हमारी निष्क्रियता बढ़ती है."

इस शोध में ये भी कहा गया है कि बचपन में टीवी देखने की आदतों की वजह से वयस्क होते तक शारीरिक मजबूती पर भी बहुत असर पड़ता है.


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Friday, 31 August 2012

लकवा ठीक हो सकता है? easy methods to treat paralysis

आधुनिक चिकित्सा विग्यान के मतानुसार लकवा मस्तिष्क के रोग के कारण प्रकाश में आता है।इसमें अक्सर शरीर का दायां अथवा बायां हिस्सा प्रभावित होता है। लकवा का आक्रमण होने पर रोगी को सीलन रहित और तेज धूप रहित कमरे मे आरामदायक बिस्तर पर लिटाना चाहिये।
Paralysis


लकवा पडने के बाद अगर रोगी ह्रीष्ट-पुष्ट है तो उसे ५ दिन का उपवास कराना चाहिये। कमजोर शरीर वाले के लिये ३ दिन के उपवास का प्रावधान करना उत्तम है। उपवास की अवधि में रोगी को सिर्फ़ पानी में शहद मिलाकर देना चाहिये। एक गिलास जल में एक चम्मच शहद मिलाकर देना चाहिये। इस प्रक्रिया से रोगी के शरीर से विजातीय पदार्थों का निष्काशन होगा, और शरीर के अन्गों पर भोजन का भार नहीं पडने से नर्वस सिस्टम(नाडी मंडल) की ताकत पुन: लौटने में मदद मिलेगी।

उपवास के बाद रोगी को कबूतर का सूप देना चाहिये। कबूतर न मिले तो चिकन का सूप दे सकते हैं। शाकाहारी रोगी मूंग की दाल का पानी पियें। रोगी को कब्ज हो तो एनीमा दें।

लहसुन की ५ कली पीसकर दो चम्मच शहद में मिलाकर रोगी को चटा दें।

१० ग्राम सूखी अदरक और १० ग्राम बच पीसलें इसे ६० ग्राम शहद मिलावें। यह मिश्रण रोगी को ६ ग्राम रोज देते रहें।

लकवा रोगी का ब्लड प्रेशर नियमित जांचते रहें। अगर रोगी के खून में कोलेस्ट्रोल का लेविल ज्यादा हो तो उपाय करना वाहिये।

रोगी तमाम नशीली चीजों से परहेज करे। भोजन में तेल,घी,मांस,मछली का उपयोग न करे।

बरसात में निकलने वाला लाल रंग का कीडा वीरबहूटी लकवा रोग में बेहद फ़ायदेमंद है। बीरबहूटी एकत्र करलें। छाया में सूखा लें। सरसों के तेल पकावें।इस तेल से लकवा रोगी की मालिश करें। कुछ ही हफ़्तों में रोगी ठीक हो जायेगा। इस तेल को तैयार करने मे निरगुन्डी की जड भी कूटकर डाल दी जावे तो दवा और शक्तिशाली बनेगी।

एक बीरबहूटी केले में मिलाकर रोजाना देने से भी लकवा में अत्यन्त लाभ होता है।

सफ़ेद कनेर की जड की छाल और काला धतूरा के पत्ते बराबर वजन में लेकर सरसों के तेल में पकावें। यह तेल लकवाग्रस्त अंगों पर मालिश करें। अवश्य लाभ होगा।

लहसुन की ५ कली दूध में उबालकर लकवा रोगी को नित्य देते रहें। इससे ब्लडप्रेशर ठीक रहेगा और खून में थक्का भी नहीं जमेगा।

लकवा रोगी के परिजन का कर्तव्य है कि रोगी को सहारा देते हुए नियमित तौर पर चलने फ़िरने का व्यायाम कराते रहें। आधा-आधा घन्टे के लिये दिन में ३-४ बार रोगी को सहारा देकर चलाना चाहिये। थकावट ज्यादा मेहसूस होते ही विश्राम करने दें।

लकवा रोगी के लिये जीवनचर्या के खास-खास नियम जो उपर बताये हैं इनका सावधानी से पालन करें। इन उपायों से अधिकांश रोगी ठीक होगे।



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