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Monday, 17 September 2012

मलेरिया की हर तीसरी दवा 'नकली'

आँकड़ों से पता चला है कि पूरी दुनिया में मलेरिया के इलाज के लिए उपयोग में आ रही हर तीसरी दवा ‘नकली’ है| इतना ही नहीं, शोध से यह भी पता चला है कि यह दवा नुकसानदेह भी है|


दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों में किए गए शोध से पता है कि इन दवाओं की गुणवत्ता बहुत ही खराब है| पंद्रह सौ लोगों पर किए गए शोध के बाद शोधकर्ताओं ने बताया है कि खराब गुणवत्ता वाली मलेरिया की दवा न सिर्फ अन्य दवाओं के असर को कम कर देती है, बल्कि दूसरे इलाजों पर भी असर डालती है|

अफ्रीकी उप सहारा के अन्य 21 देशों में 2500 लोगों पर किए गए इस सर्वे में भी इसकी पुष्टि हुई है. संक्रमण बीमारियों पर लांसेट का जो शोध है, इसे विशेषज्ञों ने चेतावनी के रूप में देखना शुरू कर दिया है.



भारत-चीन पर शोध नहीं
मलेरिया पर शोध कर रहे अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के फॉगर्टी इंटरनेशनल सेंटर के शोधकर्ताओं का मानना है कि समस्या इतनी ही नहीं है जितनी कि आकड़ों से पता चलता है. हो सकता है कि हालात इससे भी ज्यादा गंभीर हों. शोधकर्ताओं का कहना है, "ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं या फिर गलत जगह दर्ज करा दिए जाते हैं या दवा बनाने वाली कंपनियां इसे छुपा देती है."

शोधकर्ताओं ने कहा है कि दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी वाले देश भारत या चीन में इस पर गहन शोध नहीं किया गया है| शोधकर्ताओं के मुताबिक ‘शायद’ इन दोनों देशों में ही सबसे ज्यादा नकली और मलेरिया रोधी दवा बनती हैं.

तीन अरब लोगों पर खतरा
मलेरिया पर हुए शोध के प्रमुख शोधकर्ता गौरविका नायर का कहना है कि पूरी दुनिया के 106 देशों में तकरीबन 3.3 अरब लोगों पर मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है.

गौरविका नायर का कहना है, “हर साल छह लाख 55 हजार से 12 लाख लोग प्लाजमोडियम फलसिपारम के संक्रमण से मरते हैं. इनमें से ज्यादातर लोगों को इस बीमारी से और मरने से रोका जा सकता है बशर्ते कि वक्त पर अच्छी दवा, उपयुक्त समय पर मरीजों को उपलब्ध करा दिया जाए.”

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि जो देश मलेरिया से मुक्त है, वहां मलेरिया रोधी दवा का इस्तेमाल कभी डॉक्टरों के सलाह पर और कभी बिना उनके सलाह के धड़ल्ले से किया जा रहा है.

निगरानी में कमी
शोध में यह भी बताया गया है कि मलेरिया रोधी दवा के इस्तेमाल करने के बाद इस पर निगरानी रखने की व्यवस्था नहीं है. इससे गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है|
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का कहना है कि इतना कुछ होने के बाद भी मलेरिया से होनेवाली मौत में पूरी दुनिया में वर्ष 2000 से 25 फीसदी और अफ्रिका के क्षेत्र में 33 फीसदी की कमी आई है. डब्लूएचओ का मानना है कि अगर इसी रफ्तार से मलेरिया के रोकथाम का कार्यक्रम चलता रहा तो निर्धारित समय में इस बीमारी से निजात नहीं पाई जा सकती है.

डब्लूएचओ का कहना है कि सरकार को इस पर और अधिक ध्यान दिए जाने की जरुरत है. सरकार को इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए जिससे नियत समय पर इससे मुक्ति मिल सके.


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Friday, 14 September 2012

चेहरा सुन्दर बनायें

चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते, बाज़ार नए-२ प्रोडक्ट से भरा पड़ा है .क्या लगायें , क्या छोड़े, हर प्रोडक्ट के बड़े-२ वादे. लेकिन केमिकल से बने इन प्रोडक्ट्स से समय पूर्व ही चेहरा बड़ी उम्र का नज़र आने लगता है.फिर उसे ढकने के लिए, फिर कोई नया प्रोडक्ट. या फिर पार्लर का सहारा, दुनिया भर का खर्चा, समय की बरबादी के साथ सेहत की बरबादी सो अलग. इतना करने पर मन का मायूश होना फ्री में मिलता है.



तो क्या करे ???????
एक नुस्का, एक- दो सप्ताह भर आजमायें और फर्क देखें. अलोएवेरा की ताज़ा पत्ती थोड़ी सी तोड़ लें .उसमें से निकालने वाला रस चेहरे पर लगाना शुरू कर दें . १०-१५- मिनट बाद सूख जाने पर पानी से धो लिया करें .फर्क देखें और प्रकृति को धन्यवाद देते नहीं थकेंगे|




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Thursday, 13 September 2012

वायरल बुखार में खूब खाएं (Viral fever)


मौसम में बदलाव के साथ ही शरीर में भी कई प्रकार के बदलाव शुरू हो जाते हैं और गर्मी में मौसम शरीर नमीयुक्त और चिपचिपा होने लगता है। इस मौसम में वायरल बुखार से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं वायरल से होने वाला बुखार, गला दर्द व नाक बहने की समस्याएं ज्यादा लेकर आता है। यह बुखार बच्चों व बड़ों को समान रूप से प्रभावित करता है। वायरल में संक्रमण की स्थिति कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है। वायरल में कई लोग खाना-पीना छोड़ देते है। लेकिन खाना छोड़ने से बीमारी और बढ़ जाती है। इसलिए जहां तक संभव हो वायरल में खूब खाना खाएं और डिहाइडेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं।


वायरल बुखार में खाने के फायदे
वायरल बुखार तभी होता है जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैं और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खान-पान का उचित ध्यान रखना चाहिए। अगर सेहतमंद और प्रोटीन युक्त खाना खाया जाए तो शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता खुद निर्मित हो जाती है। सादा, ताजा खाना ही खाएं क्योंकि हैवी फूड आसानी से पच नहीं सकते हैं। रखे हुए खाने को गर्म करके ही खाएं क्योंकि इससे सभी बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं। खाने में अदरक, लहसुन, हींग, जीरा, काल मिर्च, हल्दी और धनिए का प्रयाग अवश्य करें क्योंकि इनमें पाए जाने वाले तत्व पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं और वायरल के कीटीणुओं से लड़ते हैं। 

वायरल बुखार में क्या-क्या खाएं 
मौसमी संतरा व नींबू खाएं जिसमें विटामिन-सी और वीटा कैंरोटीस होता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वायरल फीवर होने पर ड्राई फूड खूब खाना चाहिए।  ड्राई  फूड में जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लहसून में कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हैं। इससे सर्दी, जुकाम, दर्द, सूजन और त्वचा से संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं। लहसुन घी या तेल तलकर चटनी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। खूब पानी पिएं। इससे डिहाइडेशन के अलावा शरीर पर हमला करने वाले माइक्रो आर्गेनिज्म को बाहर निकालने में मदद मिलती है। तुलसी के पत्ते में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी रोगों से लड़ने की शक्ति होती है। बदलते मौसम में तुलसी के पत्तियों को उबालकर या चाय में डालकर पीने से नाक और गले के इंफेक्शन से बचाव होता है।

वायरल बुखार में हरी और पत्तेदार सब्जियों का अधिक मात्रा में प्रयोग करें। क्योंकि हरी सब्जियों में पानी का मात्रा ज्यादा होती है जिससे डिहाइडेशन नहीं होता है। टमाटर, आलू और संतरा खाएं। इसमें विटामिन ‘सी’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वायरल में दही खाना बंद न करें क्योंकि दही खाने से बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक मिलती है साथ ही यह पाचन क्रिया को सही रखता है। यह पेट खराब , आलसपन और बुखार को दूर रखता है। वायरल में गाजर खाएं, इसमें केरोटीन पाया जाता है जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कीटाणुओं से लड़ने में मदद मिलती है। अधिक मात्रा में केले और सेब का सेवन करें। इन दिनों में ही अधिक मात्रा में पोटेशियम पाई जाती है जो ऐसा इलेक्ट्रोलाइट है जिससे दस्त समाप्त होती है। 

वायरल बुखार में खाना खूब खाएं लेकिन खाने का गलत कंबीनेशन कभी ना लें। मसलन अगर आप दही खा रहे हैं तो हैवी नानवेज या नींबू अथवा कोई खटटी चीज ना खाएं। ठंडे और तरल पेय पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि वे शरीर में पानी रोकते हैं और असंतुलन होता है। वायरल होने पर दिमाग पर बिल्कुल जोर न लगाएं क्योंकि ऐसा करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होगी और वायरल ज्यादा दिनों तक रह सकता है।


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