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Friday, 23 November 2012

बुढ़ापे को रोकता है कम कैलोरी वाला भोजन


वजन कम करने के लिए व्‍यक्ति को सबसे पहले कैलोरी युक्‍त भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि अधिक कैलोरी लेने से वजन में बढ़ता है और यही मोटापा अन्‍य कई बीमारियों को जन्‍म देता है। हाल ही में हुए एक शोध में कम कैलोरी वाले भोजन का एक और गुण सामने आया है। इस शोध के मुताबिक लो कैलोरी वाला भोजन बढ़ती उम्र के प्रभाव को धीमा कर सकता है।

सिएटल के फ्रेड हचिंसन-कैंसर रिसर्च सेंटर ने अध्ययन में पाया कि बेहतर भोजन करने की आदत कई बीमारियों पर काबू भी किया जा सकता है। इस अध्‍ययन में पाया गया कि अगर खानपान की बेहतर आदतें अपनायी जाएं तो कई बड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, कैंसर, डिमेंशिया और हृदय संबंधी परेशानियों को भी दूर रखा जा सकता है।

ब्रिटिश अखबार ‘डेली एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि बिना बहुत ज्यादा भूख लगे लो कैलोरी वाली चीजें खाने से शरीर के महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों की कोशिकाओं के नष्ट होने की गति धीमी हो जाती है। यह उम्र बढ़ने लक्षणों को तो धीमा करता ही है साथ ही लोगों को चुस्त-दुरूस्त और स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।



Monday, 12 November 2012

दिवाली मनाये सेहत के साथ

त्योहारों के मौसम में सेहत पर असर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में आपको अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। खासतौर पर दिवाली के मौके पर। दिवाली की मिठाईया सेहत की दुश्मन हो सकती है। रोशनी के पर्व में हर व्यक्ति अपनी और अपने परिवार की सेहत की कामना करता है। ऐसे में आपको थोडी सी सावधानी रखने की भी जरूरत है। आजकल मुनाफाखोर लोग स्वार्थ वश अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के कारण दिवाली की मिठाईयों में मिलावट करने लगे हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए न सिर्फ हानिकारक है बल्कि आपको कई बीमारियों का शिकार भी बना सकती है। आइए जानें कैसे आप दिवाली मनाये सेहत के साथ।

-दिवाली के अवसर पर न सिर्फ दिवाली की मिठाईयों में बल्कि खाने-पीने की चीजें जैसे पनीर, दूध, खोया इत्यादि में भी मिलावट हो सकती है। इसीलिए आप इनको खरीदते समय खास सावधानी बरतें और ऐसे खाघ पदार्थ पैकिंग वाले ही लें और इनकी एक्सपायरी जरूर चेक करें। इससे आप मिलावटी सामान लेने से बच जाएंगे।

-दिवाली के मौके पर खूब मिठाई, चॉकलेट और पकवान इत्यादि खाने से शरीर का वजन बेवजह बढ़ जाता है। जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। ऐसे में आपको त्योहार के समय में भी अपने खान-पान पर नियंत्रण रखने की जरूरत है।

-दिवाली पर फिट रहने के लिए और त्योहार पर एन्जॉय करने के लिए आपको संतुलित आहार लेना चाहिए। इसके तहत आप बीच-बीच में हार्ड ड्रिंक, कोक इत्यादि न लेकर जूस ले सकते हैं। चाहे तो आप सब्जियों का जूस भी ले सकते हैं, ये हेल्दी और स्वादिष्ट होता है।

-दिवाली के दिनों में फिट रहने के लिए आप एकसाथ भरपेट न खाएं बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में खाते रहें।

त्योहार के समय में साधारण खाने के बजाय आप पकवान अधिक बनाते है। ऐसे में आप आटे में जौ, बाजरे के आटे को गेहूं के आटे के साथ मिक्स कर लें, ये हेल्दी भी होगा और आपको फिट भी रखेगा।

-आप दिवाली के त्योहार पर तरोताजा रहने के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी लें, इससे आपके शरीर में विषैले तत्व भी आसानी से निकल जाएंगे।

-आप खाने में सलाद, फल इत्यादि लें इससे आपकी डायट भी बैलेंस रहेगी और आपकी सेहत भी नहीं बिगड़ेगी।

-दिवाली जैसे त्याहारों के समय में आप कई बीमारियों जैसे लीवर प्रॉब्लम्स , किडनी प्रॉब्लम, सास लेने में तकलीफ, बिंज ईटिंग यानी लगातार खाने-पीने की वजह से शरीर के अंगों पर पड़ने वाले दबाव इत्यादि की समस्याओं से घिर जाते हैं। इसके अलावा आपको गैस्ट्रिक प्रॉब्लम, शुगर और कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या , खाना पचाने में मुश्किल, वजन बढ़ने की समस्याएं इत्यादि हो जाती हैं। इन सबसे बचने के लिए आपको अपनी भूख और हेल्थ के हिसाब से ही खाना चाहिए।

यदि आप त्योहारों के मौके पर अधिक ड्रायफ्रूट्स लेते हैं और साथ ही एल्कोहल, धूम्रपान इत्यादि करते हैं तो भी आपकी सेहत बिगड़ने की आशकाएं बढ़ जाती है। ऐसे में आपको इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए।

-आपको त्याहारों के समय चाय, कॉफी इत्यादि का सेवन कम करना चाहिए और ग्रीन टी इत्यादि का सेवन करना लाभकारी होता है।

-मिलावटी पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं। यह लीवर, गुर्दे सहित अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मिठाईयों में प्रयुक्त होने वाले रंग में बेहद खतरनाक केमिकल होते हैं। यह शरीर के अंगों को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आप सावधानी बरतकर ही फिट रह सकते हैं।

Tuesday, 6 November 2012

लड़कियों के लिए वजन बढ़ाने के व्यायाम


लड़कियों में वजन घटाने और हर समय पतले रहने के बारे में जोरदार माँग को देखते हुए, लड़कियों के लिए वजन बढ़ाने के व्यायाम थोडी सी आश्चर्य की बात लगती हैं। खैर, यह उन लड़कियों के लिए जो बहुत दुबलीपतली हैं और कुछ वजन और सौंदर्य़ पाने की चाह रखती हैं। यहाँ लड़कियों के लिए कुछ वजन बढ़ाने के व्यायाम दिये हैं:

व्यायाम:
  • पतली लड़कियों के लिए वजन बढ़ाने की तकनीक में सिफारिश किया जाने वाला शीर्षासन यह सबसे आम योग हैं। यह अक्सर अतिसक्रिय शरीर को आराम देने में मदद करता है। यह आसन पाचन तंत्र को भी बढ़ाता है और मांसपेशियों की लोच बढ़ता है।
  • योग थॉयराइड की समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद है। इसलिए, स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सक भी मत्स्यासन या मछली मुद्रा की सलाह देते है, जो पेट की मांसपेशियों को व्यायाम देता है और शरीर में शरीर में पोषण अवशोषण कई गुना में बढ़ जाता हैं।
  • मुक्त वजन अभ्यास एक पेशेवर ट्रेनर के मार्गदर्शन के अंतर्गत किये जा सकते है। यह मांसपेशीयों के फाइबर को उत्तेजित करते हैं।



याद रखने के कुछ मुद्दे:
  • यह सब सही खाने पर निर्भर है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी खाते रहे। एक औरत के शरीर की बनावट और मांसपेशी घनत्व एक आदमी से अलग होता हैं। इसलिए,  एक महिला के वजन बढ़ाने के बारे में पूरे विचार को बहुत सारी योजना और परामर्श की जरूरत होती है। सबसे पहले, एक महिला को उसके पतले होने के कारण का पता लगाने के लिए उसके थॉयराईड के परीक्षण के साथ साथ शरीर में हार्मोन के स्तर की जाँच करानी चाहिए।
  • लड़कियां वजन प्रशिक्षण सत्र के विकल्प भी चुन सकती हैं। उसे मांसपेशियों के निर्माण या एक निर्धारित अवधि के बाद या मर्दाना दिखने के बारे में परेशान नहीं होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक महिला का शरीर मांसपेशी फाइबर के निर्माण और पुनर्निर्माण में मदद करने वाले टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर से संपन्न नहीं होता है। इसलिए, मांसपेशियों का प्रशिक्षण आपको मर्दाना बनाने की संभावना शून्य होती है।
  • हमेशा एक पेशेवर जिम प्रशिक्षक के कडे मार्गदर्शन के तहत वजन बढ़ाने के व्यायाम करें। व्यायाम के सेट के दोहराव की आवश्यकता होती है, जो व्यक्तिगत शरीर के प्रकार के अनुसार बदलते रहते हैं। कई लड़कियां जिम में बहुत पैसे खर्च करती हैं, लेकिन कोई परिणाम नहीं दिखता, क्योंकि उनको अपने शरीर के लिए क्या सही है और क्या नहीं इसके बारे में जानकारी नहीं होती।

  • एक समय में आपके शरीर के एक क्षेत्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करे और क्षेत्र तय करे। यह पैर, कमर, कंधे, या पेट, हो सकता हैं, अपने शरीर के प्रत्येक भाग को व्यायाम मिल रहा हैं, यह सुनिश्चित करें। जब तक आपको असुविधा ना हो तब तक अपनी माँसपेशियों पर जोर डालाना और मांसपेशियों का निर्माण जारी रखना यह कुंजी है।
  • नियमित कार्डियो व्यायाम से बचें, क्योंकि वह एक लड़की के शरीर प्रकार के मामले में तेजी से कैलोरी जलाते हैं।
  • अपने आहार में प्रोटीन शामिल करें। यह आपकी शरीर के कैलोरी के हानि की क्षतिपूर्ति और मांसपेशियों के निर्माण में मदद करेंगे। पनीर, मक्खन, शहद और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ लड़कियों के वजन बढ़ाने में काफी मदद करते हैं। तो आगे बढ़े! अपने सलाद में अतिरिक्त चीज की मात्रा जोड़ें। आप अपने आहार में अधिक मात्रा में फलों के रस, पौष्टिक शेक और सोडा खुराकों को शामिल कर सकते हैं।
  • उच्च रूप में कोलेस्ट्रॉल युक्त खाद्यपदार्थों से बचें, क्योंकि इनकी व्यायाम दिनचर्या को अप्रभावी बनाने की प्रवृत्ती होती हैं।आगे चलकर  कोलेस्ट्रॉल की हृदय की धमनियों में संकुचन लाने की भी प्रवृत्ति है।
  • व्यायाम करते वक्त पानी पिये। ऊतकों और त्वचा का बहुत पसीना निकलता हैं और शरीर को उस समय के दौरान पृष्ठ रहने की जरूरत होती है।

  • लड़कियों के लिए वजन बढ़ाने के व्यायाम शुरु करने से पहले एक पोषण विशेषज्ञ या प्रमाणित आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेना हमेशा बेहतर रहता हैं।
  • मांसपेशियों के निर्माण पर अधिक ध्यान दें। प्रत्येक व्यायाम के लिए समय समर्पित करे और हर दूसरे सेट को दोहराएँ। वजन बढ़ाने के नियमों में यह सबसे अधिक पालन किये जाने वाला नियम हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए आप विभिन्न योग तकनीकों की कोशिश भी कर सकते हैं।

Sunday, 4 November 2012

उच्च रक्तचाप से दिल ही नहीं दिमाग को भी खतरा


उच्च रक्तचाप से एक ओर जहां दिल को काफी नुकसान पहुंचता है वहीं मस्तिष्क भी प्रभावित होता है। एक अध्ययन के मुताबिक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप दिमाग की संरचना और उसकी क्रिया विधि को नुकसान पहुंचाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मध्यम आयु वर्ग के जिन लोगों को तनाव न लेने की सलाह दी जाती है, उनमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क के प्रभावित होने की आशंका काफी अधिक होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क की संरचना को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। वरिष्ठ शोधकर्ता चा‌र्ल्स डीकार्ली ने बताया कि इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि व्यक्ति को कम उम्र से ही अपने रक्तचाप पर नियंत्रण रखना चाहिए। उच्च रक्तचाप की अवस्था में मस्तिष्क की कोशिकाएं भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। यह अध्ययन विज्ञान पत्रिका द लांसेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।


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Tuesday, 9 October 2012

पेट से जुड़ी कोई भी बीमारी हो, हमें बताएं निदान पाएं

हमारे भारत में खाने को मसालेदार और स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक तरह के मसालों के साथ ही प्याज, लहसुन, अदरक, हरीमिर्च और धनिया आदि डालकर खाने को जायकेदार बनाया जाता है। स्वाद बढ़ाने वाली इन चीजों में कई ऐसे रासायनिक तत्व होते हैं, जो सेहत के लिये वरदान से कम नहीं। क्योंकि ये वस्तुएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना अधिक बढ़ा देती हैं कि उस पर बीमारियां का असर होता ही नहीं। कहते हैं प्याज का तड़का खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है।


लेकिन प्याज सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता यह बहुत अधिक गुणकारी भी है। आइए आज हम आपको बताते हैं प्याज के कुछ ऐसे प्रयोग जिन्हें अपनाकर आप भी कई गंभीर समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।प्याज को काटकर सूंघने से भी सिर का दर्द ठीक होता है।  जो खाली पेट रोज सुबह प्याज खाते हैं उन्हें किसी प्रकार की पाचन समस्यायें नहीं होती और दिनभर ताजगी महसूस करते हैं। मासिक धर्म की अनियमितता या दर्द में प्याज के रस के साथ शहद लेने से काफी लाभ मिलता है। इसमें प्याज का रस 3-4 चम्मच तथा शहद की मात्रा एक चम्मच होनी चाहिए।  गर्मियों में प्याज रोज खाना चाहिए। यह आपको लू लगने से बचाएगा। प्याज का रस और सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करने से गठिया के दर्द में आराम मिलता है।


प्याज के 3-4 चम्मच रस में घी मिलाकर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। प्याज के रस में चीनी मिलाकर शर्बत बनाएं और पथरी से पीडि़त व्यक्ति को पिलाएं। इसे प्रात: खाली पेट ही पिएं। मूत्राशय की पथरी छोटे-छोटे कणों के रूप में बाहर निकल जाएगी। लेकिन ध्यान रहे, एक बार में इसका बहुत अधिक सेवन न करें। बवासीर में प्याज के 4-5 चम्मच रस में मिश्री और पानी मिलाकर नियमित रूप से कुछ दिन तक सेवन करने से खून आना बंद हो जाता है। घाव में नीम के पत्ते का रस और प्याज का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाने से शीघ्र ही घाव भर जाता है। प्याज के रस में दही, तुलसी का रस तथा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं। इससे बालों का गिरना बंद हो जाता है और रूसी की समस्या से भी निजात मिलती है।

Monday, 24 September 2012

फ्रिज में पड़ा खाना ज़हरीला तो नहीं

भोजन पर शोध करनेवाली एक संस्था का कहना है कि आर्थिक तंगी की स्थिति में लोग खाने-पीने के मामलों में ज्यादा जोखिम लेते हैं. फूड स्टैंडर्ड एजेंसी नामक संस्था के शोध से ये पता चला है कि लोग अपने खाने को ज्यादा समय तक बचाकर पैसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं.



पूरे ब्रिटेन में 2000 व्यक्तियों पर किए गए शोध से ये जानकारी सामने आई है कि आधे से अधिक लोग बचे-खुचे खाने का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं.

यहां तक कि लोग खाना खराब होने की तिथि को भी नज़रअंदाज़ करते हैं और बचे हुए भोजन को लंबे समय तक फ्रिज में रख देते हैं.

सुरक्षा पहले
इस वजह से गर्मियों में फूड प्वायजनिंग यानि खाद्या विषाक्तता के मामले बढ़ जाते हैं क्योंकि गर्म मौसम में कीटाणु तेजी से फैलते हैं.

फूड स्टैंडर्ड एजेंसी में खाद्य विशेषज्ञ बॉब मार्टिन कहते हैं, ''पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि भोजन का हमारा साप्ताहिक बिल बढ़ा है और अब हम ये कोशिश कर रहे हैं कि अपनी खरीदारी के बजट का किस तरह बेहतर से बेहतर इस्तेमाल कर सकें.''

" बचे-खुचे भोजन का बाद में इस्तेमाल करना दरअसल खाने को ज्यादा समय तक उपयोगी बनाने एक अच्छा तरीका है. लेकिन अगर हम सावधान नहीं रहें तो खाने के नुकसानदेह होने का खतरा बना रहता है." एफएसए के मुताबिक एक तिहाई लोग भोजन को देखकर या सूंघ कर ये तय करते हैं कि वो खाने लायक है या नहीं वो ये नहीं देखते कि खाना कितना पुराना है.

बॉब मार्टिन कहते हैं, ''अक्सर हम भोजन को सूंघ कर ये तय करते हैं कि वो खाने लायक है या नहीं लेकिन भोजन में पाए जाने वाले ई कोलाई और सालमोनेला जैसे सूक्ष्मजीवी खाने की महक को प्रभावित किए बिना उसे खतरनाक स्तर तक पहुंचा देते हैं. ऐसे में भोजन देखने और सूंघने में अच्छा लग सकता है लेकिन असल में वो खतरनाक होता है.'' एफएसए का कहना है कि बचे-खुचे भोजन को बिना समय बर्बाद किए फ्रिज में रख दिया जाना चाहिए और उसे दो दिन के भीतर खा लेना चाहिए और उसे तब तक पकाना चाहिए जब तक उससे गर्म भाप न निकलने लगे.

एक आंकड़े के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में हर साल तकरीबन 70,000 लोग फूड प्वायजनिंग का शिकार हो जाते हैं. भोजन के खराब होने के कई कारण बताए गए हैं जैसेकि उसे ठीक तरीके से न पकाना, उसे सही तरीके से न रखना और किसी बीमार या गंदे हाथों वाले व्यक्ति के संपर्क में आ जाना.

भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ सफाई से धोना, उसे सुरक्षित रखना और फ्रिज से निकालकर खाने से पहले उसे पर्याप्त गर्म करने से भोजन से जुड़ा जोखिम कम हो सकता है.


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Thursday, 20 September 2012

औषधीय गुणों वाला पान ( Paan )


पान को भारतीय संस्कृति में हर तरह से शुभ माना जाता है। धर्म, संस्कार, आध्यात्मिक एवं तांत्रिक क्रियाओ में भी पान का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। इसके अलावा पान का रोगों को दूर भगाने में भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। खाना खाने क बाद और मुंह का जायका बनाए रखने के लिए पान खाना बहुत ही कारगर उपाय है। कई बीमारियों के उपचार में पान का इस्तेमाल लाभप्रद माना जाता है। 


  • पान में दस ग्राम कपूर मिलाकर दिने में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है। इसके इस्तेमाल में एक सावधानी रखना जरूरी होता है कि पान की पीक पेट में न जाने पाए। 
  • चोट लगने पर पान को गर्म करके परत-परत करके चोट वाली जगह पर बांध लेना चाहिए। इससे कुछ ही घंटों में दर्द दूर हो जाता है।
  • खांसी आती हो तो गर्म हल्दी को पान में लपेटकर चबाएं। यदि खांसी रात में बढ़ जाती हो तो हल्दी की जगह इसमें अजवाइन डालकर चबाना चाहिए। 
  • यदि किडनी खराब हो तो पान का इस्तेमाल बगैर कुछ मिलाए करना चाहिए। इस दौरान मसाले, मिर्च एवं शराब  ( मांस एवं अंडा भी ) पूरा परहेज रखना चाहिए। 
  • जलने या छाले पड़ने पर पान के रस को गर्म करके लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं।
  • पीलिया ज्वर और कब्ज में भी पान का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है।
  • जुकाम होने पर पान में लौंग डालकर खाने से जुकाम जल्दी पक जाता है।
  • श्वास नली की बीमारियों में भी पान का इस्तेमाल अत्यंत कारगर है। इसमें पान का तेल गर्म करके सीने पर लगातार एक हफ्ते तक लगाने लगाना चाहिए। 
  • पण में पकी सुपारी व मुलेठी डालकर खाने से मन पर अच्छा असर पड़ता है। 
  • यू जो हमारे देश में कई तरह के पान मिलते हैं। इनमें मगही, बनारसी, गंगातीरी और देशी पान दवाइयों के रूप में ज्यादा कारगर सिद्ध होते हैं। भूख बढ़ाने, प्यास बुझाने और मसूड़ों की समस्या से निजात पाने और मसूड़ों की समस्या से निजात पाने में बनारसी एवं देशी पान फायदेमंद साबित होता है। 

वैधानिक चेतावनी : पान का अत्यधिक प्रयोग मुंह के कैंसर का कारण भी हो सकता हैं | यहाँ सिर्फ पान के औषधीय महत्त्व की जानकारी दे रहे हैं | 


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Monday, 17 September 2012

मलेरिया की हर तीसरी दवा 'नकली'

आँकड़ों से पता चला है कि पूरी दुनिया में मलेरिया के इलाज के लिए उपयोग में आ रही हर तीसरी दवा ‘नकली’ है| इतना ही नहीं, शोध से यह भी पता चला है कि यह दवा नुकसानदेह भी है|


दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों में किए गए शोध से पता है कि इन दवाओं की गुणवत्ता बहुत ही खराब है| पंद्रह सौ लोगों पर किए गए शोध के बाद शोधकर्ताओं ने बताया है कि खराब गुणवत्ता वाली मलेरिया की दवा न सिर्फ अन्य दवाओं के असर को कम कर देती है, बल्कि दूसरे इलाजों पर भी असर डालती है|

अफ्रीकी उप सहारा के अन्य 21 देशों में 2500 लोगों पर किए गए इस सर्वे में भी इसकी पुष्टि हुई है. संक्रमण बीमारियों पर लांसेट का जो शोध है, इसे विशेषज्ञों ने चेतावनी के रूप में देखना शुरू कर दिया है.



भारत-चीन पर शोध नहीं
मलेरिया पर शोध कर रहे अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के फॉगर्टी इंटरनेशनल सेंटर के शोधकर्ताओं का मानना है कि समस्या इतनी ही नहीं है जितनी कि आकड़ों से पता चलता है. हो सकता है कि हालात इससे भी ज्यादा गंभीर हों. शोधकर्ताओं का कहना है, "ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं या फिर गलत जगह दर्ज करा दिए जाते हैं या दवा बनाने वाली कंपनियां इसे छुपा देती है."

शोधकर्ताओं ने कहा है कि दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी वाले देश भारत या चीन में इस पर गहन शोध नहीं किया गया है| शोधकर्ताओं के मुताबिक ‘शायद’ इन दोनों देशों में ही सबसे ज्यादा नकली और मलेरिया रोधी दवा बनती हैं.

तीन अरब लोगों पर खतरा
मलेरिया पर हुए शोध के प्रमुख शोधकर्ता गौरविका नायर का कहना है कि पूरी दुनिया के 106 देशों में तकरीबन 3.3 अरब लोगों पर मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है.

गौरविका नायर का कहना है, “हर साल छह लाख 55 हजार से 12 लाख लोग प्लाजमोडियम फलसिपारम के संक्रमण से मरते हैं. इनमें से ज्यादातर लोगों को इस बीमारी से और मरने से रोका जा सकता है बशर्ते कि वक्त पर अच्छी दवा, उपयुक्त समय पर मरीजों को उपलब्ध करा दिया जाए.”

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि जो देश मलेरिया से मुक्त है, वहां मलेरिया रोधी दवा का इस्तेमाल कभी डॉक्टरों के सलाह पर और कभी बिना उनके सलाह के धड़ल्ले से किया जा रहा है.

निगरानी में कमी
शोध में यह भी बताया गया है कि मलेरिया रोधी दवा के इस्तेमाल करने के बाद इस पर निगरानी रखने की व्यवस्था नहीं है. इससे गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है|
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का कहना है कि इतना कुछ होने के बाद भी मलेरिया से होनेवाली मौत में पूरी दुनिया में वर्ष 2000 से 25 फीसदी और अफ्रिका के क्षेत्र में 33 फीसदी की कमी आई है. डब्लूएचओ का मानना है कि अगर इसी रफ्तार से मलेरिया के रोकथाम का कार्यक्रम चलता रहा तो निर्धारित समय में इस बीमारी से निजात नहीं पाई जा सकती है.

डब्लूएचओ का कहना है कि सरकार को इस पर और अधिक ध्यान दिए जाने की जरुरत है. सरकार को इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए जिससे नियत समय पर इससे मुक्ति मिल सके.


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Saturday, 19 May 2012

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SHAKUNTLA NURSING HOME & HOSPITAL

Dr. Bhupinder Dhami (B.P.Dhami)
M.B.B.S., D.C.H., M.I.M.A (New Born & Child Specialist)

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