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Friday, 23 November 2012

बुढ़ापे को रोकता है कम कैलोरी वाला भोजन


वजन कम करने के लिए व्‍यक्ति को सबसे पहले कैलोरी युक्‍त भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि अधिक कैलोरी लेने से वजन में बढ़ता है और यही मोटापा अन्‍य कई बीमारियों को जन्‍म देता है। हाल ही में हुए एक शोध में कम कैलोरी वाले भोजन का एक और गुण सामने आया है। इस शोध के मुताबिक लो कैलोरी वाला भोजन बढ़ती उम्र के प्रभाव को धीमा कर सकता है।

सिएटल के फ्रेड हचिंसन-कैंसर रिसर्च सेंटर ने अध्ययन में पाया कि बेहतर भोजन करने की आदत कई बीमारियों पर काबू भी किया जा सकता है। इस अध्‍ययन में पाया गया कि अगर खानपान की बेहतर आदतें अपनायी जाएं तो कई बड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह, कैंसर, डिमेंशिया और हृदय संबंधी परेशानियों को भी दूर रखा जा सकता है।

ब्रिटिश अखबार ‘डेली एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि बिना बहुत ज्यादा भूख लगे लो कैलोरी वाली चीजें खाने से शरीर के महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों की कोशिकाओं के नष्ट होने की गति धीमी हो जाती है। यह उम्र बढ़ने लक्षणों को तो धीमा करता ही है साथ ही लोगों को चुस्त-दुरूस्त और स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।



Sunday, 4 November 2012

कुर्सी से चिपके रहेंगे, तो सेहत को होगा नुकसान


लगातार कुर्सी पर बैठे रहना आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। काम के दबाव के चलते लोग कई-कई घंटे एक ही जगह और एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, बल्कि साथ ही इससे उनकी जान पर भी बन सकती है। ताजा अध्‍ययन बताते हैं कि जो लोग 11 घंटे या उससे ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं उनके अगले तीन वर्षों में मौत की संभावना बढ जाती है। भले ही हम कितना ही सक्रिय क्‍यों न रहते हों। यहां तक कि व्‍यायाम और योगा भी इसके दुष्‍प्रभाव को कम नहीं कर सकते। 

अध्ययन के अनुसार – 
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय में हुए शोध के अनुसार जो लोग तक आधे दिन तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं उनमें 40 प्रतिशत तक मौत का खतरा बढ जाता है। शोध में पाया गया कि लगातार बैठकर काम करने वालों लोगों में 3 वर्षों में मौत की संभावना दुगनी हो गई थी। लोगों की शारीरिक सक्रियता और वजन का इसके कोई संबंध नहीं है। 

देर तक बैठने से दिल को खतरा – 
लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने से बचना चाहिए। छोटी या‍त्रा के दौरान बैठने से अच्छा है कि खड़े होकर यात्रा किया जाए, इससे वजन कम होता है। 
बैठकर काम करने से शारीरिक निष्क्रियता बढती है। बैठने से शरीर में रक्त-संचार सही तरीके से से नहीं होता जिससे दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा संभावना बढ़ती है।

कुर्सी पर क्यों बैठते हैं लोग – 
ऑफिस का काम ज्यादा होने से कामकाजी लोगों को ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठना होता है। काम का प्रेशर होने के कारण लोग अपना काम पूरा करना चाहते हैं जिसके कारण कुर्सी पर बैठना पड़ता है। कंप्यूटर पर गेम खेलने और टीबी देखने के कारण भी लोग कई घंटों तक कुर्सी पर बैठते हैं। दिन में लंबी यात्रा के दौरान या लंबी हवाई यात्रा बैठकर ही करते हैं। खाली लोग जो सोने से ऊब जाते हैं वे अपना समय घर में बैठकर या पार्कों में बैठकर बिताते हैं। 

कुर्सी पर बैठने से बचने के‍ लिए –
लगातार कई घंटे तक कुर्सी पर बैठने से बचिए। अगर काम ज्यादा है तो भी थोड़े-थोड़े वक्‍त के बाद ब्रेक लेते रहिए। ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में टहलते रहना चाहिए। ऑफिस में अपने केबिन में चाय या काफी मंगाने के बजाय कैफीटीरिया में खुद जाकर कॉफी लीजिए। शाम को मॉर्केट जाते समय भी कार या बाइक की बजाए पैदल जाना ही बेहतर रहेगा। अगर आप दिन में लंबी यात्रा कर रहे हैं तो अपनी सीट पर बैठने के बजाय लेटकर यात्रा कीजिए। लंबी यात्रा के दौरान अपनी सीट से उठकर बीच-बीच में टहलते रहिए।  

ज्यादा देर तक बैठने से शरीर की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। लगातार कुर्सी पर कई घंटे तक बैठने से बैक पेन की समस्या शुरू हो सकती है। आपको कुर्सी पर बैठने के दौरान अगर कोई समस्‍या हो तो अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।


Shakuntla Hospital provide Maternity Hospital, X-Ray Service Hospital, Ultra Sound Hospital, Maternity Nursing Home, Women's Health, Medical Treatment, Healthcare Hospital, Stone Removal, Urological Solution, Specialist Doctors, Preventive Health Checkups Services.



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Friday, 5 October 2012

लकवा रोग की सरल चिकित्सा.


आधुनिक चिकित्सा विग्यान के मतानुसार लकवा मस्तिष्क के रोग के कारण प्रकाश में आता है।इसमें अक्सर शरीर का दायां अथवा बायां हिस्सा प्रभावित होता है। लकवा का आक्रमण होने पर रोगी को सीलन रहित और तेज धूप रहित कमरे मे आरामदायक बिस्तर पर लिटाना चाहिये।

लकवा पडने के बाद अगर रोगी ह्रीष्ट-पुष्ट है तो उसे ५ दिन का उपवास कराना चाहिये। कमजोर शरीर वाले के लिये ३ दिन के उपवास का प्रावधान करना उत्तम है। उपवास की अवधि में रोगी को सिर्फ़ पानी में शहद मिलाकर देना चाहिये। एक गिलास जल में एक चम्मच शहद मिलाकर देना चाहिये। इस प्रक्रिया से रोगी के शरीर से विजातीय पदार्थों का निष्काशन होगा, और शरीर के अन्गों पर भोजन का भार नहीं पडने से नर्वस सिस्टम(नाडी मंडल) की ताकत पुन: लौटने में मदद मिलेगी।

उपवास के बाद रोगी को कबूतर का सूप देना चाहिये। कबूतर न मिले तो चिकन का सूप दे सकते हैं। शाकाहारी रोगी मूंग की दाल का पानी पियें। रोगी को कब्ज हो तो एनीमा दें।


लहसुन की ५ कली पीसकर दो चम्मच शहद में मिलाकर रोगी को चटा दें।


१० ग्राम सूखी अदरक और १० ग्राम बच पीसलें इसे ६० ग्राम शहद मिलावें। यह मिश्रण रोगी को ६ ग्राम रोज देते रहें।

लकवा रोगी का ब्लड प्रेशर नियमित जांचते रहें। अगर रोगी के खून में कोलेस्ट्रोल का लेविल ज्यादा हो तो उपाय करना वाहिये।

रोगी तमाम नशीली चीजों से परहेज करे। भोजन में तेल,घी,मांस,मछली का उपयोग न करे।

बरसात में निकलने वाला लाल रंग का कीडा वीरबहूटी लकवा रोग में बेहद फ़ायदेमंद है। बीरबहूटी एकत्र करलें। छाया में सूखा लें। सरसों के तेल पकावें।इस तेल से लकवा रोगी की मालिश करें। कुछ ही हफ़्तों में रोगी ठीक हो जायेगा। इस तेल को तैयार करने मे निरगुन्डी की जड भी कूटकर डाल दी जावे तो दवा और शक्तिशाली बनेगी।
         एक बीरबहूटी केले में मिलाकर रोजाना देने से भी लकवा में अत्यन्त लाभ होता है।
सफ़ेद कनेर की जड की छाल और काला धतूरा के पत्ते बराबर वजन में लेकर सरसों के तेल में पकावें। यह तेल लकवाग्रस्त अंगों पर मालिश करें। अवश्य लाभ होगा।

लहसुन की ५ कली दूध में उबालकर लकवा रोगी को नित्य देते रहें। इससे ब्लडप्रेशर ठीक रहेगा और खून में थक्का भी नहीं जमेगा।

लकवा रोगी के परिजन का कर्तव्य है कि रोगी को सहारा देते हुए नियमित तौर पर चलने फ़िरने का व्यायाम कराते रहें। आधा-आधा घन्टे के लिये दिन में ३-४ बार रोगी को सहारा देकर चलाना चाहिये। थकावट ज्यादा मेहसूस होते ही विश्राम करने दें।
लकवा रोगी के लिये जीवनचर्या के खास-खास नियम जो उपर बताये हैं इनका सावधानी से पालन करें। इन उपायों से अधिकांश रोगी ठीक होगे।