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Sunday, 4 November 2012

उच्च रक्तचाप से दिल ही नहीं दिमाग को भी खतरा


उच्च रक्तचाप से एक ओर जहां दिल को काफी नुकसान पहुंचता है वहीं मस्तिष्क भी प्रभावित होता है। एक अध्ययन के मुताबिक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप दिमाग की संरचना और उसकी क्रिया विधि को नुकसान पहुंचाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने पाया है कि मध्यम आयु वर्ग के जिन लोगों को तनाव न लेने की सलाह दी जाती है, उनमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क के प्रभावित होने की आशंका काफी अधिक होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसमें उच्च रक्तचाप से मस्तिष्क की संरचना को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। वरिष्ठ शोधकर्ता चा‌र्ल्स डीकार्ली ने बताया कि इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि व्यक्ति को कम उम्र से ही अपने रक्तचाप पर नियंत्रण रखना चाहिए। उच्च रक्तचाप की अवस्था में मस्तिष्क की कोशिकाएं भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। यह अध्ययन विज्ञान पत्रिका द लांसेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।


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Monday, 24 September 2012

फ्रिज में पड़ा खाना ज़हरीला तो नहीं

भोजन पर शोध करनेवाली एक संस्था का कहना है कि आर्थिक तंगी की स्थिति में लोग खाने-पीने के मामलों में ज्यादा जोखिम लेते हैं. फूड स्टैंडर्ड एजेंसी नामक संस्था के शोध से ये पता चला है कि लोग अपने खाने को ज्यादा समय तक बचाकर पैसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं.



पूरे ब्रिटेन में 2000 व्यक्तियों पर किए गए शोध से ये जानकारी सामने आई है कि आधे से अधिक लोग बचे-खुचे खाने का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं.

यहां तक कि लोग खाना खराब होने की तिथि को भी नज़रअंदाज़ करते हैं और बचे हुए भोजन को लंबे समय तक फ्रिज में रख देते हैं.

सुरक्षा पहले
इस वजह से गर्मियों में फूड प्वायजनिंग यानि खाद्या विषाक्तता के मामले बढ़ जाते हैं क्योंकि गर्म मौसम में कीटाणु तेजी से फैलते हैं.

फूड स्टैंडर्ड एजेंसी में खाद्य विशेषज्ञ बॉब मार्टिन कहते हैं, ''पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि भोजन का हमारा साप्ताहिक बिल बढ़ा है और अब हम ये कोशिश कर रहे हैं कि अपनी खरीदारी के बजट का किस तरह बेहतर से बेहतर इस्तेमाल कर सकें.''

" बचे-खुचे भोजन का बाद में इस्तेमाल करना दरअसल खाने को ज्यादा समय तक उपयोगी बनाने एक अच्छा तरीका है. लेकिन अगर हम सावधान नहीं रहें तो खाने के नुकसानदेह होने का खतरा बना रहता है." एफएसए के मुताबिक एक तिहाई लोग भोजन को देखकर या सूंघ कर ये तय करते हैं कि वो खाने लायक है या नहीं वो ये नहीं देखते कि खाना कितना पुराना है.

बॉब मार्टिन कहते हैं, ''अक्सर हम भोजन को सूंघ कर ये तय करते हैं कि वो खाने लायक है या नहीं लेकिन भोजन में पाए जाने वाले ई कोलाई और सालमोनेला जैसे सूक्ष्मजीवी खाने की महक को प्रभावित किए बिना उसे खतरनाक स्तर तक पहुंचा देते हैं. ऐसे में भोजन देखने और सूंघने में अच्छा लग सकता है लेकिन असल में वो खतरनाक होता है.'' एफएसए का कहना है कि बचे-खुचे भोजन को बिना समय बर्बाद किए फ्रिज में रख दिया जाना चाहिए और उसे दो दिन के भीतर खा लेना चाहिए और उसे तब तक पकाना चाहिए जब तक उससे गर्म भाप न निकलने लगे.

एक आंकड़े के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में हर साल तकरीबन 70,000 लोग फूड प्वायजनिंग का शिकार हो जाते हैं. भोजन के खराब होने के कई कारण बताए गए हैं जैसेकि उसे ठीक तरीके से न पकाना, उसे सही तरीके से न रखना और किसी बीमार या गंदे हाथों वाले व्यक्ति के संपर्क में आ जाना.

भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ सफाई से धोना, उसे सुरक्षित रखना और फ्रिज से निकालकर खाने से पहले उसे पर्याप्त गर्म करने से भोजन से जुड़ा जोखिम कम हो सकता है.


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Wednesday, 19 September 2012

ऑपरेशन से पैदा हुए बच्चे हो सकते हैं मोटे

अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है कि कुदरती तरीके के बजाए ऑपरेशन के जरिए जन्म लेने वाले शिशुओं में जरूरत से ज्यादा मोटा होने का खतरा दो गुना ज्यादा होता है. मेसाचुसेट्स स्थित बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि तीन साल की उम्र तक आते-आते इन बच्चों पर चर्बी चढ़ना शुरु हो जाता है.



शोध दल का कहना है कि हो सकता है कि चीरफाड़ की वजह से उस बैक्टीरिया पर असर पड़ता हो जिसका संबंध भोजन के पाचन से होता है.
शोधकर्ताओं ने वर्ष 1999 से वर्ष 2002 के दौरान 1255 मां-बच्चों का अध्ययन किया. इन माताओं पर शोध तभी शुरू कर दिया गया था जब उनका गर्भ 22 हफ्तों का भी नहीं था. जन्म के फौरन बाद शिशु का वजन किया गया. शिशु जब तीन वर्ष का हो गया, उसका वजन दोबारा किया गया.

जन्म का तरीका
शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रत्येक चार में से एक बच्चे का जन्म ऑपरेशन के जरिये हुआ. बच्चे का जन्म कुदरती तरीके से हुआ या ऑपरेशन से, इसक सीधा संबंध बच्चे के वजन और उसकी त्वचा के मोटेपन से पाया गया. शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि ऑपरेशन के जरिये बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं का वजन अपेक्षाकृत ज्यादा तेजी से बढ़ता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को इस बारे में बताया जाना चाहिए कि ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म देने पर बच्चे के मोटे होने का खतरा ज्यादा होता है.

ब्रिटेन में पैदा होने वाले बच्चों में से 23 प्रतिशत से भी ज्यादा शिशुओं का जन्म ऑपरेशन के जरिए होता है. रॉयल कॉलेज के प्रवक्ता पैट्रिक ओब्रियन का कहना है, ''ये एक रोचक अध्ययन है, लेकिन इसमें जितने मामलों की पड़ताल की गई, उनकी संख्या कम है. इस अध्ययन को अपेक्षाकृत ज्यादा लोगों पर आजमाने की जरूरत है.''


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Tuesday, 18 September 2012

तनाव दूर करने के लिए अपने बच्चे के साथ खूब खेलें

अकेले बच्चों का पालन-पोषण कर रही मां को तनाव दूर करने के लिए अपने नन्हे-मुन्ने के साथ जी भर का खेलना चाहिए। कैनसास स्टेट विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक शोध में यह दिलचस्प बात सामने आई है कि बच्चों के साथ ज्यादा दोस्ताना रवैया रखना चाहिए बच्चे के लिए तो फायदेमंद होता ही है साथ में उनके माता पिता का तनाव खत्म करने में भी मददगार साबित होता है।


शोध में शामिल ब्लेक बेरीहिल कहतीं हैं कि अकेले बच्चों का लालन-पालन कर रही मां के समक्ष आर्थिक संकट, ज्यादा काम और सीमित सहयोग जैसी बड़ी-बड़ी समस्याएं होती हैं, ऐसे में तनाव होना स्वाभिवक है और उसे दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है बच्चों के साथ खेलना। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में अमेरिका में करीब एक करोड़ ऐसी महिलाएं थी जो पति की सहायता के बिना ही बच्चों की परवरिश कर रहीं थी। आंकड़ों की माने तो अमेरिका में 2010 में जन्में करीब 39 प्रतिशत बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेली मांओ पर थी। बेरीहिल ने अकेली मां पर जारी राष्ट्रीय आंकड़ों और करीब 2370 महिलाओं के मानसिक तनाव और बच्चों के साथ उनके व्यवहार तथा बच्चों के स्वभाव पर विस्तृत अध्ययन किया।

अध्ययन में यह बात सामने आई की कि बच्चे के स्वभाव का सीधा असर मां के स्वभाव पर पड़ता है। बच्चा यदि जिद्दी है अथवा वह अपनी मां की बात नहीं मानता है तो मां पहले चिंतित होती है फिर धीरे-धीरे तनाव में आ जाती है। शोध के मुताबिक जो मां एक वर्ष की कम उम्र के बच्चे के साथ मेलजोल रखती है उनका बच्चा बड़ा होकर भी मां के ज्यादा करीब रहता है और मां का तनाव भी कम होता है।

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Friday, 14 September 2012

चेहरा सुन्दर बनायें

चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते, बाज़ार नए-२ प्रोडक्ट से भरा पड़ा है .क्या लगायें , क्या छोड़े, हर प्रोडक्ट के बड़े-२ वादे. लेकिन केमिकल से बने इन प्रोडक्ट्स से समय पूर्व ही चेहरा बड़ी उम्र का नज़र आने लगता है.फिर उसे ढकने के लिए, फिर कोई नया प्रोडक्ट. या फिर पार्लर का सहारा, दुनिया भर का खर्चा, समय की बरबादी के साथ सेहत की बरबादी सो अलग. इतना करने पर मन का मायूश होना फ्री में मिलता है.



तो क्या करे ???????
एक नुस्का, एक- दो सप्ताह भर आजमायें और फर्क देखें. अलोएवेरा की ताज़ा पत्ती थोड़ी सी तोड़ लें .उसमें से निकालने वाला रस चेहरे पर लगाना शुरू कर दें . १०-१५- मिनट बाद सूख जाने पर पानी से धो लिया करें .फर्क देखें और प्रकृति को धन्यवाद देते नहीं थकेंगे|




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Saturday, 21 April 2012

Patient Zone

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Shakuntla Hospital (www.shakumtlahospital.com)

Saturday, 24 March 2012

Specialized Corporate Services

  1. Pre-employment checkup, general checkup, before joining an organization.
  2. Once a week medical checkup for employees by our medical office.
  3. Talk on ergonomics or any topics related to medical.
  4. First aid training program conducted.
  5. Ambulance service along with a doctor or nurse for any of the events in your organization.
  6. Home care services along with a doctor or nurse for any of the events in your trained attendees nurses.
  7. Supply all hospital equipments on rental basis, i.e. O2 cylinder, hospital cot, Wheel chair, commode chair, portable x-ray, collecting samples.