Showing posts with label Maternity Nursing Home. Show all posts
Showing posts with label Maternity Nursing Home. Show all posts

Friday, 8 February 2013

हेल्दी रहना है तो दांतों की भी फिक्र करें

आज हम सभी अपने स्वा स्य्ों  को लेकर जागरूक हैं। सर्दी, जु़काम हो या सरदर्द हमें पता है कि इस स्थिसति में क्याक करना है। लेकिन मुंह स्वांस्य्ैं  को लेकर आज भी लोगों में जागरूकता की कमी है।  

डॅाक्टसर अपर्णा शर्मा का कहना है कि दांतों और मसूड़ों की समस्याजओं से बचने के लिए ब्रशिंग और फ्लॅासिंग के साथ चिकित्साक से मिलना ज़रूरी है। दिन में एक बार फ्लासिंग करें और सोने से पहले ब्रश ज़रूर करें।  

दांतों की सामान्य् समस्या एं:
•    दांतों में छेद : अधिक मीठा खाने पर या कई अन्यै कारणों से हमारे मुंह में मौजूद बैक्टीरिया एसिड पैदा करने लगते हैं, जिससे दांतों में छेद (कैविटीज़) हो जाती हैं। 
•    प्लॅााक और टारटर: प्लॅािक हर एक के दांतों में होता है। दांतों की सफाई करने के तुरंत बाद, प्लॅा क  का बनना शुरू हो जाता है। अगर इसे रोजाना अच्छी तरह से साफ  नहीं किया गया तो इसे कठोर टारटर में तब्दील होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।
•    जिंजिवाइटिस:यह मसूड़ों की बीमारी है, जिसमें मसूडें सूज जाते हैं या इनसे खून रिस सकता  है।
•    पेरिओडोन्टाल  रोग: यह मसूड़ों का गंभीर रोग है, जो दांतों से जुड़ी हड्डी तथा उसके आस-पास के उत्तको को भी नष्ट कर देता है।  

क्याप आप जानते हैं:
•    इनेमल शरीर का सबसे कठोर भाग होता है।  
•    हमारी जीभ जहां व्यंकजनों का स्वा्द लेने में हमारी मदद करती है वहीं यह चिकित्सगकों को हमारी बीमारी का भी पता देती है। 
•    हमारा मुंह किसी भी बीमारी को सबसे पहले दर्शाता है। 
•    मुंह के अंदर की रेखा को ‘ओरल म्यूरकोसा’ कहते हैं और इसका लाल या गुलाबी रंग का होना स्व स्थ  शरीर का संकेत देता है।

दांतों का स्वादस्य्ो   हमारे संपूर्ण स्वा’स्य्ैं  को प्रभावित कर सकता है और गंभीर बीमारियों को भी जन्मक दे सकता है, तो आज से ही सजग हो जायें।

Shakuntla Nursing Home & Hospital Are Pleased To Introduce Ourselves As One of The Ultra modern Nursing Home & Hospital Offering The Widest Range of Medical facilities. We provide Hospital in west delhi, Ecg service hospital, Women's health, Child health nursing home, Medical treatment, Stone removal, Urological solution & Specialist doctors.

Sunday, 23 December 2012

सर्दी जुकाम से बचाव


आपकी जीवनशैली और आदतें कैसी भी हों कामन कोल्ड बहुत ही आम होने के कारण किसी भी मौसम में हो सकता है। इसलिए यह जानकारी थोड़ी अनोखी है कि कामन कोल्ड से निज़ात पाने का कोई शार्ट कट नहीं है चाहे आप कितनी भी दवाइयां या वैक्सीन लें।

कामन कोल्ड का संक्रमण थोड़ा डरावना होता है और इसके लक्षण जैसे खांसी, बुखार , सर्दी आपको दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आप कोई वैक्सीन नहीं ले रहे हैं तो आपको कामन कोल्ड के लक्षणों से बचना चाहिए। कामन कोल्ड से बचने के कुछ तरीके:

कामनकोल्ड से रोकथाम

हम सभी जानते हैं कि कामन कोल्ड संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है और इसलिए ऐसे में हाथ धोना बहुत ज़रूरी है। समय समय पर हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है क्योंकि कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते है जो फिर टेलिफोन, डेस्क, सेलफोन या डोरबेल पर चिपक जाते हैं। ऐसे कीटाणु स्वचालित तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं।

पर्याप्त मात्रा में पेय लें:

कोल्ड जैसी परेशानी के समय पानी पीना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि पानी से हमारा शरीर साफ हो जाता है और शरीर में मौजूद टाक्सिन निकल जाते हैं और रिहाइड्रेशन की क्रीया होती है ा चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार लेने से भी कोल्ड जैसी बीमारी से राहत मिलती है।

साफ और ताज़ा वायु लेना ज़रूरी है:

कामन कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति के लिए घर की चारदीवारी के अंदर रहना समझदारी की बात है। लेकिन ऐसे में लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरीके से कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है। व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा लेना ज़रूरी होता है।

पेपेर की तौलिया का इस्तेमाल:

ऐसी सलाह दी जाती है कि हाथों को साफ करने के लिए किचन और बाथरूम में पेपर की तौलिया का इस्तेमाल करना चाहिए। घर में प्रत्येक सदस्य की अलग तौलिया होनी चाहिए जिससे कि कीटाणु ना फैलें।

बहुत ज़्यादा शराब पीने से प्रतीरक्षा प्रणाली का ह्रास:

विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि व्यक्ति को एक सीमित मात्रा मेंअल्कोहल का सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण होने का अधिक खतरा रहता है। अल्कोहल शरीर में शुष्की पैदा करता है और इससे जर्मस आसानी से बढ़ जाते हैं।

अपने चेहरे को बार बार ना छूएं:

कोल्ड होने पर अपने चेहरे, नाक और मुंह को बार बार ना छूएं, क्‍योंकि ऐसे में अगर आपके आसपास किसी को कोल्ड हुआ हो तो आपको भी कोल्ड होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

फाइटोकेमिकल्स फ्लू और कोल्ड से लड़ने में प्रभावी:

व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतीरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को साफ करती हैं।

Monday, 17 December 2012

रक्त से स्टेम सेल बनाने की तकनीक खोजी


अब मरीज के गंभीर रोगों का इलाज उसी के खून से संभव हो सकेगा। यह कामयाबी मिलेगी रक्त को स्टेम सेल के रूप में विकसित करने की तकनीक से जिसे कैंब्रिज विश्‌र्र्वविद्यालय में कार्यरत गोरखपुर की बेटी इंबिशात गेती ने खोज निकाला है। रक्त से बनी कोशिकाओं का प्रयोग कर हृदय, दिमाग, आख, अस्थि आदि अंगों की बीमारियों का इलाज हो सकेगा।

गेती का शोध दुनिया के जाने-माने जर्नल स्टेम सेल्स ट्रास्लेशनल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोध में रक्त से बनी स्टेम सेल्स का प्रयोग रक्त वाहिनिया बनाने में किया गया है। चिकित्सा विज्ञान में इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इंबिशात के मुताबिक इन स्टेम सेल्स की खासियत यह है कि वे अपने को शरीर के किसी भी अंग की कोशिकाओं के रूप में विकसित कर सकती हैं। इसी विशेषता के कारण ये हृदय, दिमाग, किडनी, नेत्र सहित किसी भी अंग की बीमारियों का इलाज करने में सक्षम हैं। शोध के समय गेती ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि ये कोशिकाएं एक ऐसे रिपेयर सेल के रूप में काम करें जो रक्त के जरिये पहुंचकर रक्त वाहिनियों की मरम्मत कर सकें। इस शोध निष्कर्ष के बाद उन्हें स्टेम सेल के तौर पर विकसित किया गया है।

इंबिसात गेती ने बताया कि स्टेम सेल बनाने का सबसे आसान व सुलभ स्त्रोत मरीज का रक्त है। हमने इस तकनीक को आसान, सस्ता व जल्द पूरा होने वाला बनाने की कोशिश की है। इंबिशात ने गोरखपुर विश्‌र्र्वविद्यालय से बीएससी और बैंगलोर से एमएससी किया। इसके बाद कैंब्रिज विश्‌र्र्वविद्यालय ज्वाइन कर शोध कार्य शुरू किया। उनका शोध पत्र हाल ही में प्रकाशित हुआ है। शोध में 11 लोगों ने उनका सहयोग किया है। स्टेम सेल खुद को शरीर के किसी भी अंग की कोशिकाओं के रूप में विकसित कर सकती हैं। नए सेल्स का निर्माण भी कर सकती हैं।

कैसे बेहतर नई तकनीक

-स्टेम सेल्स कई तरह के होते हैं। इपिथियल स्टेम सेल्स त्वचा कोशिकाओं के रूप में विकसित किए जा सकते हैं।

-न्यूरो स्टेम सेल्स न्यूरो संबंधित रोगों के इलाज में कारगर हैं, पर यह दोनों स्टेम सेल्स सिर्फ उसी अंग के इलाज में कारगर हैं जहा से निकाले गए हैं।

-बड़ी उम्र के लोगों के अंगों से स्टेम सेल्स तैयार करने में दिक्कत है कि उन्हें अलग करना आसान नहीं होता, क्योंकि वे सीमित मात्रा में होते हैं।

-भ्रूण से बने स्टेम सेल्स हर तरह की कोशिकाएं बना सकते हैं लेकिन इससे इलाज में कई दिक्कतें भी हैं।

-भ्रूण हत्या से जुड़ी होने के कारण यह तकनीक विवादित है। साथ ही ऐसी कोशिकाओं को शरीर आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता, जैसी दिक्कत अंग प्रत्यारोपण में आती है।

-स्टेम सेल का एक दूसरा जरिया मानव त्वचा है। इसे भी शरीर स्वीकार कर सकता है, पर त्वचा या अन्य अंगों से निकाली कोशिकाओं के लिए बायोप्सी करनी पड़ती हैं।

-ये सभी तरीके कठिन होने के साथ ही खर्चीले व अधिक समय लेने वाले हैं। रक्त से तैयार स्टेम सेल्स निकालने का तरीका आसान, कम खर्चीला व कारगर है। 

Thursday, 13 December 2012

बच्चों को भी हो सकता है अस्‍थमा


बच्चों में अस्‍थमा का मुख्‍य कारण दूषित वातावरण है। इसके साथ ही कुछ मांएं अपने बच्‍चों को स्‍तनपान नहीं करवाती हैं, जिसका असर बच्‍चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और उसकी सेहत पर पड़ता है। जिससे वे अस्थमा सहित कई दूसरी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

अस्थमा श्वास संबंधी रोग है। इसमें श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है।

अस्थमा के कारण 

एलर्जी- एलर्जी और अस्थमा का गहरा संबंध होता है। कुछ बच्‍चे पर्दे, गलीचे, कार्पेट, धुएं, रूई के बारीक रेशे, ऊनी कपड़े, फूलों के पराग, जानवरों के बाल, फफूंद और कॉकरोच जैसे कीड़े के प्रति एलर्जिक होते हैं।

मोटापा- मोटापा भी अस्थमा का एक बड़ा कारण है। बच्‍चों का अधिक वजन फेफड़ों पर अधिक दबाव डालता है जिससे अस्थमा की आशंका बढ़ जाती है।

वायु प्रदूषण- प्रदूषण की वजह से अस्थमा की समस्या लगातार बढ़ रही है।

स्मोकिंग- सिगरेट के धुएं से भरे माहौल में रहने वाले शिशुओं को अस्थमा होने का खतरा होता है। यदि प्रेग्‍नेंसी के दौरान कोई स्‍त्री सिगरेट के धुएं के बीच रहती है, तो उसके बच्चे को अस्थमा होने का खतरा होता है।

मौसम का बदलाव- तापमान में बदलाव से एलर्जी के मामले बढ़ते हैं। ज्यादा गर्म और नम वातावरण में अस्‍‍थमा के फैलने की सम्भावना अधिक होती है। ठंडी हवा से भी अस्थमा का दौरा पड़ सकता है।

आनुवांशिक- आमतौर पर अस्थमा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। जब माता-पिता दोनों को अस्थमा होता है, तो उनके बच्चों को भी अस्थमा होने की संभावना अधिक रहती है।


अस्थमा के लक्षण
दिल की धड़कन का बढऩा
अक्सर सर्दी-जुकाम या खांसी का होना
रात में और सुबह कफ की शिकायत होना    
सांस लेने में परेशानी, बेचैनी
खेलने और एक्सरसाइज के दौरान जल्दी थकना व सांस फूलना   
सीने में जकडऩ व दर्द की शिकायत
सांस लेने पर घरघराहट जैसी आवाज आना

अपनाएं ये परहेज

अस्थमा होने पर बच्‍चों को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि वे सामान्य जिंदगी व्यतीत कर सकें।

एलर्जी के कारणों से रहें दूर- जिन चीजों से एलर्जी हो उनसे दूर रहें, जैसे कुछ बच्‍चो को पुरानी किताबों की गंध, परफ्यूम, अगरबत्ती, धूप, कॉकरोच, पालतू जानवरों आदि से एलर्जी होती है। 

उचित खान-पान- अस्थमा की वजह गलत खानपान भी है। तला हुआ खाना अस्थमा को बढ़ाता है। जंक फूड न खाएं इससे एलर्जिक अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। गाजर, शिमला मिर्च, पालक और दूसरे गहरे रंग के फलों और सब्जियों को डाइट में शामिल करें, क्योंकि इनमें बीटा कैरोटीन होता है।

मौसम में परेशानी - अगर आपके बच्‍चे को मौसमी परेशानी हो तो उसे मौसम के शुरू होने से पहले डॉक्टर की सलाह से प्रिवैंटिव इनहेलर दे सकते हैं।

लेट नाइट खाना न खिलाए - रात को देर से खाना खाकर सो जाने से अस्थमैटिक बच्‍चों के लिए नुक्सान होता है। इसलिए बच्‍चों को सोने से कम से कम 2 घंटे पहले डिनर करवा दें।



Tuesday, 11 December 2012

कैंसर की शुरूआती अवस्था


कैंसर को बहुत ही खतरनाक रोग माना जाता है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह मरीज की जान ले लेता है। ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि इसका पता बहुत देर से लगता है। इसलिए अगर इस रोग की शुरूआती अवस्था में हीं इसका इलाज शुरू कर दिया जाये तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। आज के ज़माने में मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब बहुत से कैंसर के मरीजो की जान बचा ली जाती है। इसलिए इस जानलेवा रोग से अब घबराने कि जरूरत नहीं है लेकिन इसकी शुरूआती अवस्था के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता जरूर है। 

आम तौर पर साधारण इंसान सिर्फ स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, ब्रेन कैंसर, हड्डियों का कैंसर, ब्लड कैंसर इत्यादि के बारे में जानता है। जबकि कैंसर सौ से भी ज्यादा प्रकार के हो सकते हैं। इसलिए विभिन्न प्रकार के कैंसर की शुरूआती अवस्था एक दूसरे से भिन्न होती है।

कैंसर का प्रथम चरण यानि प्राम्भिक अस्वस्था

कैंसर के प्रथम चरण को प्रारंभिक अवस्था भी कहा जाता है। प्रथम चरण को उप चरण जैसे 1 ए  और 1 बी में भी बांटा  जा सकता है। 1 ए की अवस्था में आम तौर पर घातक  ऊतक आकार में 2 से 3 सेमी से अधिक नहीं होते हैं और अपने मूल अंग के भीतर ही भीतर निहित रहते है।

लेकिन जैसे जैसे यह रोग बढ़ता है यानि 1 बी की अवस्था में पहुँचता है तो कैंसर कोशिकाओं के आकार में बृद्धि होने लगती है जो इस अवस्था में भी मूल अंग के साथ हीं निहित रहता है लेकिन कुछ मामलों में इसका मेटास्टेसिस होना यानी दूसरे अंगों तक फैलना या दूसरे  अंगों तक पहुंचना भी संभव होता है। यदि मेटास्टेसिस होता है, तो इसका मतलब है कि कैंसर दूसरे अंगों तक फैल रहा है।

ऐसी अवस्था में सर्जरी शायद एक उपयुक्त उपचार माना जाता है। इस प्रकार की सर्जरी में पीड़ित अंग के खास हिस्से को रिसेक्स्न नामक प्रक्रिया के माध्यम से निकाल दिया जाता है।  लेकिन आप बाहरी बीम विकिरण चिकित्सा या कीमोथेरपी की सहायता से भी कैंसर की वृद्धि को रोक सकते हैं अथवा कैंसर कोशिकाओं को ख़त्म कर सकते हैं।

अगर उपरोक्त सारे उपचार अप्रभावी साबित हों तो आप एक नैदानिक परीक्षण का सहारा ले सकते हैं जिसमें  शल्य चिकित्सा, विकिरण या रसायन चिकित्सा के विभिन्न संयोजन शामिल होते हैं यानि एक साथ  कई उपाय अपनाये जा सकते हैं।   

कैंसर का दूसरा चरण

जब हम कैंसर की माध्यमिक स्तर की चर्चा करते हैं तब इसका मतलब  होता है कि हम आम तौर पर कैंसर के दूसरे चरण की चर्चा कर रहे हैं। यह चरण भी  सामान्यतः 2 ए और 2 बी के उप - चरणों में बंटा हुआ रहता है।  स्टेज 2 ए में, घातक ऊतक आकार में 2 से 3 सेमी होते हैं और इसके असामान्य कोशिकाएं पड़ोसी लिम्फ नोड्स यानि अपने आसपास के अंगों में मेटासिस हुए रहते हैं। जब कैंसर आगे 2 बी  चरण की ओर प्रगति करने लगता है तो इस अवस्था में भी लिम्फ नोड्स प्रभावित हुए रहते हैं लेकिन आप पाएंगे कि कैंसर का मेटासिस भी होने लगा है यानि कैंसर कोशिकाएं दूसरे अंगो तक भी पहुँचने लगे हैं।

इस चरण में भी कैंसर के पहले चरण वाली चिकित्सा हीं उपयोग में लाई जाती है मसलन सर्जरी के जरिये हानिकारक उत्तकों को निकालना या बाहरी विकिरण की चिकित्सा प्रदान करना ताकि कैंसर के गांठ को कम किया जाये या बढ़ने से रोका जा सके या उसके कुछ भाग को नष्ट किया जा सके या केमोथेरपी के जरिये कैंसरस कोशिकाओं को फैलने से रोका जा सके। आम तौर पर  पहले सर्जरी की जाती है उसके बाद केमोथेरपी या विकिरण चिकित्सा दी जाती है।

कैंसर का ज्ञात कैसे किया जाता है

बायोप्सी के द्वारा भी कैंसर का ज्ञात किया जाता है। इसमें कैंसर के एक छोटे  भाग को निकालकर उसका परीक्षण किया जाता है। गाँठ छोटी होने पर पूरी गाँठ हीं निकाल  ली जाती है लेकिन गाँठ बड़ी होने पर उसका थोडा भाग हीं निकाला जाता है ताकि परिक्षण किया जा सके। मेमोग्राम के जरिये भी आप कैंसर का पता लगा सकते हैं। एम् आर आई भी ब्रेन ट्यूमर का पता लगाने में काफी कारगर सिद्ध होता है। 
कैंसर से घबराएं नहीं; कैंसर के लक्षण को पहचाने तथा सही समय पर सही उपचार लें।



Shakuntla Hospital provide Maternity Hospital, X-Ray Service Hospital, Ultra Sound Hospital, Maternity Nursing Home, Women's Health, Medical Treatment, Healthcare Hospital, Stone Removal, Urological Solution, Specialist Doctors, Preventive Health Checkups Services,  Stone removal, X-ray service hospital, Women's health, Medical treatment &Urological solution.



Commercial Gas : In the liquefied petroleum gas (LPG) trade, 'industrial installations' generally refer to the installation at factories and the 'commercial installations' relate to the larger type of catering establishments, such as hotel, restaurants and canteens.
Industrial Gas : In the liquefied petroleum gas (LPG) trade, 'industrial installations' generally refer to the installation at factories and the 'commercial installations' relate to the larger type of catering establishments, such as hotel, restaurants and canteens.
Burners Fitting : Gas operated Infra Red Radiant Burners (can be adapted to radiant heat if required). Industrial uses include Brooding, Curing, Drying, Food Processing, almost all purposes where Metal Fabricating and Finishing, Textile Drying and Weld Pre-heating. Also available in longer length. This item is also available in as per customer requirement .
LPG Plants : Bulk LPG Installation can be Designed,  Supplied, Installed & Commissioned on  turnkey Basis In Accordance to Explosive Norms/Local Statutory Requirements.
Gas Cylinders : LOT  Manifold is installed where peak load of Equipments is higher & everage consumption of LPG is up no much ie its up to 2 tone per day.  We called this is a small bullet. It can install instead of bulk where there is space no space for bulk installation. This system is completely safe to handle. We follow Is-6044 Part-1 & 2 & OISD norms for these types of installations.

Friday, 7 December 2012

कम वसामुक्त भोजन रखेगा आपको पतला


अगर आप अपने मोटापा को घटाने के लिए रात दिन मशक्कत करते है। इसके बावजूद मनमाफिक परिणाम नहीं मिल रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। अपने खानपान में वसायुक्त खाद्य पदार्थो की जगह कम वसायुक्त

चीजों को शामिल करें इससे दुबला होने में मदद मिलेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समर्थित एक शोध में यह बात कही गई है।

अमेरिका, यूरोप व न्यूजीलैंड में 73,589 लोगों पर किए गए 33 परीक्षण में पता चला है कि कम वसायुक्त भोजन खाने से लोगों को 3.5 पाउंड वजन कम करने में मदद मिलती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि शोध के परिणाम पहली बार साबित करते हैं कि बिना अधिक मशक्कत के भी लोग अपना वजन कम कर सकते हैं। प्रमुख शोधकर्ता यूर्निवसिटी ऑफ ईस्ट एंजेलिया मेडिकल स्कूल की ली हूपर ने कहा कि जब लोग कम वसा वाला भोजन खाते हैं तो उनकावजन घटता है।

शोध के दौरान उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो अपने खानपान में वसा की कटौती कर रहे थे, लेकिन उनका लक्ष्य वजन को कम करना नहीं था। इसलिए वे सामान्य भोजन खा रहे थे। हूपर ने कहा कि आश्चर्यजनक बात यह थी कि उनका वजन कम हुआ और उनकी कमर पतली हुई। शोधकर्ताओं ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के न्यूट्रीशन गाइडेंस एक्सपर्ट एडवाइजरी ग्रुप से वसा के सेवन पर दिशा-निर्देशों को अपडेट करने के आग्रह के बाद

उसने शोध की समीक्षा की। अब डब्ल्यूएचओ वैश्रि्वक स्तर पर इसकी सिफारिश करेगा। मोटापे के कारण कई बीमारियों जैसे कैंसर, स्ट्रोक और दिल संबंधी अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण दुनियाभर में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत हो जाती है।



Shakuntla Hospital provide Maternity Hospital, X-Ray Service Hospital, Ultra Sound Hospital, Maternity Nursing Home, Women's Health, Medical Treatment, Healthcare Hospital, Stone Removal, Urological Solution, Specialist Doctors, Preventive Health Checkups Services,  Stone removal, Ultra sound hospital, X-ray service hospital, Women's health, Medical treatment &Urological solution.

Computer Repair Services : We provide full-service technology solutions for today's businesses. Offering computer repair services we repair your computer as early as possible because we understand the value of time and priority of business. Any critical services from computer networking and offsite data backup services to web site design, our consultants bring extensive experience in the rapidly advancing areas of technology and design. We repair your computer as early as possible because we understand the value of time and priority of business.   
Computer Networking : AMC for hardware and networking for offices, corporate, individuals. New products installations is also possible at affordable cost. We are providing computer networking services at affordable prices. You can install one time network set-up or on the basis of regular Computer Networking AMC, This computer annual maintenance service will be managed by our skilled staff. Corporate AMC for desktop and laptop is available.
Computer networking services : AMC for hardware and networking for offices, corporate, individuals. New products installations is also possible at affordable cost. We are providing computer networking services at affordable prices. You can install one time network set-up or on the basis of regular Computer Networking AMC, This computer annual maintenance service will be managed by our skilled staff. Corporate AMC for desktop and laptop is available.
Computer Repair Services Delhi : We provide full-service technology solutions for today's businesses. Offering computer repair services we repair your computer as early as possible because we understand the value of time and priority of business. Any critical services from computer networking and offsite data backup services to web site design, our consultants bring extensive experience in the rapidly advancing areas of technology and design. We repair your computer as early as possible because we understand the value of time and priority of business.   
Onsite LAN Setup : Having a network professionally installed will let your employees share data more quickly and communicate more effectively. We have complete solution in onsite LAN setup we will help you evaluate, design and install the optimum integrated system for your company. We offer instant Response reliable service dedicated staff. Computer Doctor committed to perform in well-order for onsite LAN setup.